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भोपाल नगर निगम का 'महंगा' पुण्य: 4.62 लाख में सिर्फ 42 प्याऊ, फाइलें अभी टेंडर में ही अटकीं

भोपाल नगर निगम की कार्यप्रणाली का आलम यह है कि मार्च माह के अंत में टेंडर निकाले गए। टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि सात अप्रैल है, जिसके बाद आवंटन की प्...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Fri, 03 Apr 2026 02:37:11 PM (IST)Updated Date: Fri, 03 Apr 2026 02:37:27 PM (IST)
भोपाल नगर निगम का 'महंगा' पुण्य: 4.62 लाख में सिर्फ 42 प्याऊ, फाइलें अभी टेंडर में ही अटकीं
भोपाल नगर निगम 4.62 लाख में सिर्फ 42 प्याऊ लगाएगा

HighLights

  1. 37 डिग्री तक पहुंचा पारा, अभी टेंडर-टेंडर खेल रहा निगम
  2. प्याऊ खड़ा करने के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई स्वाहा
  3. 42 स्थानों पर रखे जाएंगे 252 मटके, प्लास्टिक के मग और गिलास

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। जनता की प्यास बुझाना पुण्य का काम हो सकता है, लेकिन भोपाल नगर निगम के लिए यह केवल ''बजट ठिकाने'' लगाने का जरिया बन गया है। जब शहर में पारा 37 डिग्री तक पहुंच चुका है, तब निगम का निगम का जल कार्य विभाग सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल के लिए प्याऊ लगवाने के लिए टेंडर-टेंडर खेल रहा है। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि महज 42 अस्थाई प्याऊ खड़ा करने के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के 4.62 लाख रुपये स्वाहा किए जा रहे हैं।

इन प्याऊ केंद्रों पर कोई हाई-टेक इंतजाम नहीं होने वाले। वही मिट्टी के मटके, बांस-बल्ली के स्टैंड, ग्रीन नेट और प्लास्टिक के मग-गिलास ही रहेंगे। टेंडर के गणित के अनुसार, एक अस्थाई प्याऊ की लागत करीब 11,000 रुपये बैठ रही है, जबकि यह काम मोहल्ला समितियां कुछ हजार रुपये में कर लेती हैं। इसके साथ ही निगम की कार्यप्रणाली का आलम यह है कि मार्च माह के अंत में टेंडर निकाले गए। टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि सात अप्रैल है, जिसके बाद आवंटन की प्रक्रिया होगी।


इसके बाद ठेकेदार को काम पूरा करने के लिए 30 दिन का समय दिया जाएगा। यानी जब मई अंत और जून में मानसून दस्तक देने ही वाला होगा, तब निगम प्याऊ खड़ा करने का स्वांग रचेगा। जबकि अप्रैल और मई के दौरान ही गर्मी अपने चरम पर होती है। साफ जाहिर है कि मंशा जनता को राहत देने की नहीं, बल्कि बजट को ठेकेदारों के साथ मिलकर बंदरबांट करने की है।

ब्राडिंग पर ज्यादा जोर

टेंडर दस्तावेजों के मुताबिक, शहर के 42 स्थानों पर कुल 252 मटके खरीदे जाने हैं। इसमें 168 मटके 20 लीटर और 84 मटके 50 लीटर क्षमता के होंगे। धूप से बचाव के लिए 1254 वर्ग मीटर की ग्रीन नेट और बांस के खंभों का जाल बिछाया जाएगा।

विडंबना यह है कि प्यास बुझाने से ज्यादा जोर अपनी ब्रांडिंग पर है, क्योंकि हर प्याऊ पर 30 वर्ग फीट के फ्लेक्स-बैनर लगाने का प्रावधान भी इसी बजट में शामिल है। कुल मिलाकर, यह पुण्य का काम नहीं, बल्कि गर्मी के मौसम में 'बजट की गंगा' में हाथ धोने की तैयारी नजर आती है। टेंडर में 18 प्रतिशत जीएसटी और देरी पर 1 प्रतिशत जुर्माने का प्रावधान रखा गया है, लेकिन लागत का औचित्य स्पष्ट नहीं किया गया है।

यह भी पढ़ें- भोपाल के छोटे तालाब के वजूद पर संकट, एनजीटी ने केंद्र और राज्य सरकार सहित सात विभागों को जारी किया नोटिस

टेंडर में इन बातों का जिक्र

सामग्री - संख्या

20 लीटर के मिट्टी के मटके ढक्कन के साथ - 168

50 लीटर मिट्टी के मटके - 84

ग्रीन नेट - 1254 स्क्वायर मीटर

बैनर - 1260 स्क्वायर फीट

एक लीटर प्लास्टिक मग - 84

प्लास्टिक गिलास - 252

मटके रखने के लिए बांस का स्टैंड - 252