
अनुज मैना, नवदुनिया भोपाल। डिजिटल इंडिया के दौर में सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन और सरल बनाया जा रहा है, ताकि आमजन को सरकारी दफ्तरों के चक्कर ना लगाने पड़े और घर बैठे ही उनका काम हो जाए। वहीं, नगर निगम भोपाल की वेबसाइट आम नागरिकों के लिए उलझन का कारण बन रही है।
दरअसल, नगर निगम की वेबसाइट https://www.bmconline.gov.in/ का होमपेज अंग्रेजी में खुलता है, जिससे अंग्रेजी न जानने वाले नागरिक वेबसाइट का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि वेब पेज पर जब वेबसाइट को गूगल ट्रांसलेशन के जरिये हिंदी में बदला जाता है, तो कई शब्दों का अर्थ ही बदल जाता है। इससे हिंदी पढ़ने वालों को समझ ही नहीं आता कि आखिर यह है क्या।
मसलन, उपयोगकर्ता जब वेबसाइट को गूगल के ट्रांसलेशन टूल से इसे हिंदी में बदलता है, तो उसमें अंग्रेजी शब्द 'टेंडर' का अर्थ हिंदी में 'नाजुक' बन जाता है। जबकि 'होर्डिंग' का मतलब बदलकर हिंदी में 'जमाखोरी' हो जाता है।
इसी तरह शहर को जानें कॉलम में वन विहार बदलकर 'तूफान आ रहा है' हो जाता है। इसी तरह कुछ अन्य शब्द भी बदल जा रहे हैं जो उपयोकर्ताओं के लिए दिक्कत भरा होता है।
बता दें कि नगर निगम भोपाल की वेबसाइट वर्ष 2015 में बनाई गई थी। इसके बाद इसे अपडेट किया जा चुका है। वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार इसे 2023 में आखिरी बार अपडेट किया गया था। तब से यह इसी फार्मेट में है।
उपयोकर्ता नगर निगम की वेबसाइट को हिंदी में शुरू करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि नगर निगम भोपाल के अधिकारी इससे अनजान बने हुए हैं और अब वेबसाइट में जल्द हिंदी विकल्प जोड़ने की बात कह रहे हैं।
हैरत की बात यह है कि दो साल से वेबसाइट को अपडेट तक नहीं किया गया, जबकि तकनीक के इस दौर में हर छह महीने में मोबाइल तक में वर्जन अपडेट हो जाते हैं। कई वेबसाइट व एप तो लगातार अपना अपडेट वर्जन देते रहते हैं ताकि वे सुरक्षित रह सकें और उपयोगकर्ताओं के लिए यह आसान रहे।
जब मुझे पता चला कि नगर निगम की वेबसाइट पर जाकर टैक्स जमा कर सकते हैं, तो मैंने वेबसाइट खोली, क्योंकि मैं मोबाइल हिंदी में चलाता हूं और वेबसाइट अंग्रेजी में थी, तो मुझे थोड़ी परेशानी जरूर हुई। बाद में किसी की मदद से इसका इस्तेमाल किया।
- राजेश कुमार, रहवासी, आनंद नगर
मुझे ज्यादा अंग्रेजी नहीं आती है। एक बार मैं नगर निगम वेबसाइट पर सर्च कर रहा था तो देखा कि उसमें हिंदी वर्जन का ऑप्शन ही नहीं है। ऐसे में वेबसाइट के कई शब्दों का पता ही नहीं चलता है। वेबसाइट में हिंदी वर्जन भी होना चाहिए।
- सुरेंद्र राजपूत, रहवासी, करोंद
इस तरह की परेशानी आ रही है तो इसको दिखवाते हैं। वेबसाइट में हिंदी वर्जन भी जुड़वा लिया जाएगा।
- तन्मय वशिष्ठ शर्मा, अपर आयुक्त, नगर निगम