भोपाल GIS घोटाला: बाजार में ₹20 हजार की मोटर, नगर निगम ने ₹45 हजार में खरीदी
जीआईएस के दौरान फाउंटेन के लिए 7.5 एचपी मोटर 45 हजार रुपये और 10 एचपी मोटर 58,500 रुपये में खरीदी गई। बाजार में इनकी कीमत क्रमशः करीब 20 से 27 हजार और 32 से 34 हजार रुपये बताई गई है।
Publish Date: Fri, 06 Nov 2026 12:44:35 PM (IST)Updated Date: Fri, 06 Nov 2026 12:44:35 PM (IST)
जीआईएस के दौरान भोपाल नगर निगम में मोटर खरीदी में गड़बड़ी सामने आई है। फाइल फोटो।HighLights
- बाजार में 20 हजार की मोटर निगम ने 45 हजार में खरीदी
- एसओआर दरें होने के बावजूद नॉन-एसओआर बताकर खरीदी
- लोकायुक्त की आपत्ति के बाद भी जांच रिपोर्ट लंबित
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। नगर निगम में फाउंटेन खरीदी के नाम पर सरकारी रकम खर्च करने का ऐसा तरीका सामने आया है, जिसमें बाजार भाव भी पीछे छूट गया और शासन की निर्धारित दरें भी। जिन मोटरों की कीमत बाजार में 20 से 34 हजार रुपये के बीच बताई जा रही है, उनके लिए निगम ने 45 हजार से लेकर 58 हजार 500 रुपये तक चुकाए।
इन मोटरों की दरें नगरीय प्रशासन विभाग की एसओआर सूची में भी दर्ज हैं, इसके बावजूद खरीदी को नॉन-एसओआर बताकर ज्यादा कीमत पर भुगतान किया गया।
ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में की खरीदी
दरअसल, पिछले साल राजधानी में आयोजित ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट (जीआईएस) के दौरान निगम ने फव्वारों के लिए खरीदी गई 7.5 एचपी की मोटर का भुगतान 45 हजार रुपये किया गया। जबकि बाजार में इसी क्षमता की किर्लोस्कर मोटर करीब 20 हजार और सीजी कंपनी की मोटर करीब 27 हजार रुपये में उपलब्ध बताई जा रही है। यानी बाजार के इन भावों के मुकाबले निगम ने 18 से 25 हजार रुपये तक ज्यादा चुकाए।
इसी तरह 10 एचपी की मोटर के लिए 58,500 रुपये का भुगतान किया गया, जबकि बाजार में सीजी की मोटर करीब 32 हजार और किर्लोस्कर की मोटर करीब 34 हजार रुपये में मिल रही है। इस हिसाब से निगम ने करीब 24,500 से 26,500 रुपये तक अतिरिक्त खर्च किए।
एसओआर में दर, फिर भी नॉन-एसओआर का खेल
मामला सिर्फ बाजार भाव से महंगी खरीदी का नहीं है। नगरीय प्रशासन विभाग की एसओआर में 7.5 एचपी मोटर की दर 31,955 रुपये और 10 एचपी मोटर की दर 37,416 रुपये निर्धारित है। इसके बावजूद निगम ने दोनों मोटरों को नान-एसओआर श्रेणी में रखकर खरीदी की। एसओआर के मुकाबले भी 7.5 एचपी मोटर पर 13,045 रुपये और 10 एचपी मोटर पर 21,084 रुपये अधिक भुगतान किया गया।
लोकायुक्त में शिकायत की जांच में भी लापरवाही
इस मामले को लेकर लोकायुक्त में नगर निगम के अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग और प्रभारी कार्यपालन यंत्री आरके त्रिवेदी के खिलाफ शिकायत की गई। लोकायुक्त ने मामले के लिए जांच के लिए निगम को पत्र लिखा, तो निगम ने अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग से ही मामले की जांच करा दी और उदित गर्ग ने भी शिकायत के सभी बिंदुओं पर खुद को क्लीन चिट दे दी।
इस पर लोकायुक्त ने आपत्ति दर्ज कराते हुए दोबारा जांच के लिए पत्र लिखा, लेकिन करीब चार से पांच माह बाद भी जांच रिपोर्ट लोकायुक्त पास नहीं पहुंच सकी है।
जीआईएस के दौरान नगर निगम द्वारा लगाए गए फाउंटेन को लेकर की गई शिकायत की पहली रिपोर्ट पर हमने आपत्ति जताई थी और दोबारा जांच के लिए कहा था। नगर निगम ने अब इसकी रिपोर्ट नगरीय प्रशासन विभाग को भेजी है। नगरीय प्रशासन विभाग के आयुक्त इस मामले में अगले महीने लोकायुक्त में पेश होकर रिपोर्ट पेश करेंगे। - अविनाश नेमा, मुख्य अभियंता, लोकायुक्त