भोपाल में नर्सिंग छात्रों का अनोखा प्रदर्शन, MP Nursing Council की प्रतीकात्मक अर्थी निकाली
भोपाल में नर्सिंग छात्रों ने परीक्षा और रिजल्ट में देरी के विरोध में एमपीएनआरसी की प्रतीकात्मक अर्थी निकालकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने लंबित परीक्षाएं...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 13 Aug 2026 07:12:55 PM (IST)Updated Date: Thu, 13 Aug 2026 07:12:55 PM (IST)
भोपाल में नर्सिंग छात्रों का अनोखा प्रदर्शन। (नईदुनिया)HighLights
- नर्सिंग छात्रों ने एमपीएनआरसी की प्रतीकात्मक अर्थी निकाली बुधवार।
- छात्रों ने परीक्षा और रिजल्ट में देरी पर विरोध जताया।
- 2022-23 बीएससी नर्सिंग प्रथम वर्ष रिजल्ट जारी करने मांग।
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। नर्सिंग परीक्षा और रिजल्ट में देरी से नाराज छात्रों ने बुधवार को मध्यप्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल (एमपीएनआरसी) के खिलाफ अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने काउंसिल की प्रतीकात्मक अर्थी निकाली और उसका क्रियाकर्म कर अपनी नाराजगी जताई। प्रदर्शन के दौरान परीक्षा नियंत्रक एवं हाई कोर्ट मामलों के ओआईसी धीरज गोविंदानी और लीगल एडवाइजर हरीश बारी के प्रतीकात्मक पुतले भी जलाए गए।
नर्सिंग छात्र संगठन के सदस्य संदीप परमार ने कहा कि सत्र 2021-22 के उन विद्यार्थियों को जीएनएम अंतिम वर्ष की परीक्षा में शामिल किया जाए, जिन्होंने मान्यता प्राप्त संस्थानों में प्रवेश लिया और परीक्षा फार्म भरा है। वहीं सत्र 2022-23 के बीएससी नर्सिंग विद्यार्थियों का प्रथम वर्ष का रिजल्ट जारी कर उन्हें द्वितीय वर्ष की परीक्षा में शामिल करने की मांग की गई है।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी परीक्षा नहीं
- परमार ने कहा कि सत्र 2022-23 से जुड़े मामले में हाई कोर्ट का आदेश आए एक साल से अधिक समय हो चुका है। इसके बावजूद परीक्षा नहीं कराई गई। छात्रों ने लंबित परीक्षाएं जल्द कराने और मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
- छात्रों ने वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 में नर्सिंग संस्थानों का निरीक्षण कर मान्यता देने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए और इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
लीगल एडवाइजर की भूमिका पर भी सवाल
- संदीप परमार ने लीगल एडवाइजर हरीश बारी की नियुक्ति और भूमिका पर सवाल उठाते हुए कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बारी एक नोटरी अधिवक्ता होने के बावजूद काउंसिल में लीगल एडवाइजर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
- परमार ने यह भी आरोप लगाया कि वे एक साथ दो जगह कार्यरत हैं और बिना उपस्थिति दर्ज किए काउंसिल से वेतन ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विधानसभा में प्रश्न भी लगाया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
10 करोड़ रुपये के भुगतान की जांच की जाए
- परमार ने आरोप लगाया कि काउंसिल के कई मामलों को अदालत में ले जाने से कानूनी खर्च बढ़ा और छात्रों की फीस से बड़ी राशि वकीलों को भुगतान की गई। उन्होंने करीब 10 करोड़ रुपये के भुगतान की जांच और पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।
- छात्रों का कहना है कि यह राशि विद्यार्थियों से ली गई नामांकन और परीक्षा फीस से जुड़ी है, इसलिए इसके उपयोग का हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक लंबित परीक्षाओं और रिजल्ट को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
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