
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भोपाल रेल मंडल में ट्रेनों के संचालन को और सुरक्षित बनाने के लिए रेलवे नई तकनीक अपनाने जा रहा है। ट्रैक और पहियों के बीच होने वाले घर्षण को कम करने के लिए मंडल में 45 स्थानों पर ऑटोमैटिक गेज फेस लुब्रिकेटर (इलेक्ट्रॉनिक प्रकार) लगाए जाएंगे। इस परियोजना पर करीब 7.19 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे 60 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन संचालन के दौरान पहियों और पटरियों के बीच लगातार घर्षण होता है। विशेष रूप से मोड़ वाले हिस्सों में यह घर्षण अधिक होने से ट्रैक और पहियों का घिसाव बढ़ जाता है, जिससे रखरखाव पर अधिक खर्च करना पड़ता है। नई तकनीक से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
सेंसर के जरिए अपने आप होगा लुब्रिकेशन
इलेक्ट्रॉनिक गेज फेस लुब्रिकेटर सेंसर आधारित तकनीक से काम करेंगे। इनमें लगे सेंसर आवश्यकता के अनुसार ट्रैक पर चिकनाई वाला पदार्थ छोड़ेंगे। इससे रेलवे कर्मचारियों को बार-बार मैन्युअल तरीके से लुब्रिकेशन नहीं करना पड़ेगा और पूरी प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।
लुब्रिकेशन से पहियों और पटरियों के बीच घर्षण कम होगा, जिससे दोनों का घिसाव घटेगा। इससे ट्रैक और पहियों की उम्र बढ़ेगी और रखरखाव पर होने वाला खर्च भी कम होगा।
रेल संचालन होगा अधिक सुरक्षित
रेलवे का कहना है कि नई तकनीक से ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित और सुचारु होगा। घर्षण कम होने से ट्रैक पर दबाव घटेगा और तकनीकी खराबियों की संभावना भी कम होगी। इससे यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का लाभ मिलेगा।
निगरानी और रखरखाव का कार्य अधिक प्रभावी
भारतीय रेलवे ट्रैक मेंटेनेंस को आधुनिक बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। भोपाल रेल मंडल में इस व्यवस्था के लागू होने के बाद ट्रैक की निगरानी और रखरखाव का कार्य अधिक प्रभावी हो सकेगा।