भोपाल: स्वच्छ राजधानी के तमगे पर लगा दाग, 3200 टन कचरे से बेहाल रहा शहर
शुक्रवार देर रात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ बातचीत में मांगों पर सहमति बनी। नगर निगम सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा गई।
Publish Date: Sat, 07 Nov 2026 01:45:32 PM (IST)Updated Date: Sat, 07 Nov 2026 01:45:32 PM (IST)
महापौर मालती राय, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार 10 नंबर मार्केट पर झाडू लगाई। सौ- नगर निगमHighLights
- चार दिन की हड़ताल से भोपाल में 3200 टन कचरा जमा
- मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद काम पर लौटे सफाईकर्मी
- कचरा जलाने से प्रदूषण और स्वास्थ्य का खतरा
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। नियमितीकरण, वेतन वृद्धि और ठेका प्रथा खत्म करने जैसी मांगों को लेकर नगर निगम सफाई कर्मचारियों की जारी हड़ताल शुक्रवार देर रात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुई बातचीत के बाद समाप्त हुई। लिहाजा शनिवार से शहर की सफाई व्यवस्था दोबारा पटरी पर लौट आएगी, लेकिन हड़ताल के चौथे दिन शुक्रवार को राजधानी की जो दुर्गति हुई, उसने नागरिकों को दिनभर बेहाल किए रखा।
चार दिनों से कचरा न उठने के कारण शहर के भीतर करीब 3200 टन से अधिक कचरे पड़ा रहा, जिसके चलते लोगों को धनतेरस जैसे बड़े पर्व पर भी असहनीय बदबू और गंदगी के बीच समय काटना पड़ा।
चौराहों से लेकर पॉश इलाकों तक कचरे के ढेर
शुक्रवार को भोपाल की सूरत पूरी तरह बिगड़ चुकी थी। त्योहार के सीजन में जहां घरों और बाजारों में रौनक थी, वहां आम रास्तों पर सिर्फ पॉलीथिन और सड़ांध बिखरी नजर आई। 12 नंबर मुख्य सड़क किनारे कचरे का बड़ा ढेर लगा रहा, जिससे राहगीरों का निकलना दूभर हो गया। गुलमोहर रोड बसंत कुंज के सामने कचरा सड़क तक फैलने से ट्रैफिक जाम और बदबू की स्थिति बनी रही।
चार इमली क्षेत्र का यह वीआईपी इलाका भी गंदगी के असर से नहीं बच सका और चौराहों पर कचरा पसरा दिखा। त्योहारी खरीदारी के मुख्य केंद्र न्यू मार्केट में जगह-जगह लगे कचरों के ढेरों ने खरीदारों और व्यापारियों का दम फुला दिया। कोलार सिक्स लेन रोड के किनारे कचरे के बड़े-बड़े अंबार दिनभर मुंह चिढ़ाते रहे।
मृत जानवर की बदबू से बदहाल रोड
हालात इतने बदतर हो गए कि बागसेवानिया रोड पर सड़क किनारे मृत पड़े जानवर से उठती दुर्गंध ने लोगों का पैदल चलना तक मुश्किल कर दिया। परेशान होकर स्थानीय लोग कई जगहों पर कचरे के ढेर में आग लगाते दिखे, जिससे उठते जहरीले धुएं ने हवा को और दमघोंटू बना दिया।
स्वच्छ राजधानी के तमगे पर लगा दाग
देश में लगातार छह बार 2019 से 2024 तक सबसे स्वच्छ राजधानी का राष्ट्रीय खिताब जीतने वाले और सेवन स्टार रेटिंग हासिल करने वाले भोपाल में आम दिनों में 800 से 900 टन कचरा निकलता है, जो दीपोत्सव पर बढ़कर 1000 से 1100 टन तक पहुंच जाता है। चार दिनों की हड़ताल से शहर में करीब 3200 टन कचरा सड़कों पर ही जमा रहा। शुक्रवार देर रात जब इंटरनेट मीडिया पर हड़ताल समाप्ति की खबर आई, तब जाकर शहरवासियों ने राहत की सांस ली।
सभी मांगों पर सहमति बन गई है। शासन स्तर पर कमेटी गठित की गई है, जो एक महीने में प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। - मगनलाल झांझोट, प्रदेश अध्यक्ष, अखिल भारतीय
सफाई मजदूर ट्रेड यूनियनशहर में बदहाल कचरा प्रबंधन का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगा। 17 नवंबर की सुनवाई से पहले कचरे और उसे जलाने की तस्वीरें कोर्ट में पेश कर जवाबदेही तय करने की मांग करेंगे।- सुभाष सी. पांडे, पर्यावरणविद्
कचरा और प्लास्टिक जलने से निकलने वाले जहरीले धुएं से हवा की गुणवत्ता बिगड़ी है। इससे अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों में एक्यूट अटैक का खतरा बढ़ता है। बच्चों और बुजुर्गों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।-डॉ. पराग शर्मा, श्वसन रोग विशेषज्ञ, हमीदिया अस्पताल