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21 साल बाद भोपाल को मिलेगा नया मास्टर प्लान! 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, राहत मिली तो जल्द लागू होगा नया ड्राफ्ट

Bhopal Master Plan Update: भोपाल के मास्टर प्लान लाने को लेकर लंबे समय से चली आ रही मांग जल्द पूरी हो सकती है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग इसका खाका खी...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 12 Sep 2026 05:59:18 PM (IST)Updated Date: Sat, 12 Sep 2026 05:59:18 PM (IST)
21 साल बाद भोपाल को मिलेगा नया मास्टर प्लान! 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, राहत मिली तो जल्द लागू होगा नया ड्राफ्ट
सरकार रखेगी मास्टर प्लान की जरूरत का पक्ष।

HighLights

  1. भोपाल के बेतरतीब विकास पर लगेगी लगाम
  2. सरकार रखेगी मास्टर प्लान की जरूरत का पक्ष
  3. उद्योग-व्यापार के लिए आरक्षित होंगे नए क्षेत्र

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। भोपाल के मास्टर प्लान लाने को लेकर लंबे समय से चली आ रही मांग जल्द पूरी हो सकती है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग इसका खाका खींच चुका है। 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में रहवासी क्षेत्रों में वाणिज्यिक गतिविधियों पर रोक लगाने संबंधी मामले की सुनवाई प्रस्तावित है।

इसमें सरकार की ओर से पिछले वर्षों में भोपाल में हुए विस्तार, जनसंख्या वृद्धि, मेट्रोपालिटन क्षेत्र घोषित होने, औद्योगिक विकास सहित अन्य आधार पर मास्टर प्लान की आवश्यकता को लेकर पक्ष रखा जाएगा। यदि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलती है तो फिर सरकार मास्टर प्लान लाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगी।


1995 में लागू हुआ था पिछला मास्टर प्लान

भोपाल का पिछला मास्टर प्लान वर्ष 1995 में लागू हुआ था। तब शहर की आबादी 10 से 15 लाख के बीच थी। इसकी अवधि दिसंबर 2005 में समाप्त हो चुकी है। वर्ष 2010 में मास्टर प्लान-2021 का प्रारूप तैयार किया गया था। इसमें 813 वर्ग किमी क्षेत्र और 196 गांव शामिल किए गए थे। प्रारूप को लेकर कई आपत्तियां थीं, इसके बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

इससे शहर का सुनियोजित के स्थान पर बेतरतीब विकास हुआ। जहां-तहां मार्केट बन गए। रहवासी क्षेत्रों में बड़ी-बड़ी दुकानें, माल बन गए। इससे रहवासियों को समस्या हुईं। यातायात गड़बड़ाया। जाम की स्थिति बनने लगी।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और सरकार का पक्ष

इस बीच रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती की तो नगर निगम ने कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील कर दिया। व्यापारी विरोध में सड़कों पर उतरे तो रहवासी भी कार्रवाई के पक्ष में खड़े हो गए। सरकार ने बीच का रास्ता निकालने के लिए समिति बना दी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताते हुए इस कदम को अवमानना की श्रेणी में मानने की बात कही। आनन-फानन में आदेश निरस्त किया गया।

15 सितंबर को मामले की सुनवाई प्रस्तावित है। इसमें सरकार अब तक उठाए गए कदमों के बारे में विस्तृत जानकारी तो रखेगी ही, साथ में यह भी बताएगी कि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकास सुनिश्चित करने के लिए मास्टर प्लान आवश्यक है। इसमें उन सभी निर्देशों को समाहित किया जाएगा जो रहवासी और व्यवसायी सभी के हितों को सुरक्षित करते हों। सूत्रों का कहना है कि यदि कोर्ट द्वारा राहत मिलती है तो फिर सरकार इसका प्रारूप जल्द से जल्द जारी करके सभी संबंधित पक्षों से सुझाव लेकर अंतिम रूप देगी।

18 मीटर से कम चौड़ी सड़क पर दुकानें नहीं चलेंगी

सूत्रों का कहना है कि मास्टर प्लान को जो खाका तैयार किया गया है, उसमें रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्पष्ट नियम रखे जाएंगे। जिन क्षेत्रों में मुख्य सड़क की चौड़ाई 18 मीटर से कम होगी, वहां व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन की अनुमति नहीं होगी। पार्किंग सहित निर्धारित शर्तों को पूरा करना अनिवार्य रहेगा। प्रस्तावित मास्टर प्लान में मेट्रो कारिडोर के आसपास 15 मंजिल तक बहुमंजिला भवनों के निर्माण की अनुमति का प्रविधान किया जा सकता है।

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कृषि क्षेत्र में स्कूल-अस्पताल की भी अनुमति

मास्टर प्लान में कृषि क्षेत्र के उपयोग को लेकर भी बदलाव प्रस्तावित हैं। निर्धारित प्रक्रिया और अनुमति के बाद यहां स्कूल, कालेज, अस्पताल, गोदाम जैसी गतिविधियां संचालित की जा सकेंगी। इसके अलावा शहर के चारों कोनों में उद्योग और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आवश्यकतानुसार स्थान आरक्षित किए जाएंगे।