_m.webp)
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। आदमपुर कचरा खंती में बढ़ते कचरे के पहाड़ को कम करने के लिए नगर निगम अब गीले कचरे से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) बनाने की तैयारी कर रहा है। करीब नौ एकड़ क्षेत्र में वेस्ट-टू-CBG प्लांट प्रस्तावित है। इसमें शहर से रोज मिलने वाले करीब 400 टन गीले कचरे को प्रोसेस कर प्रतिदिन 16 से 18 टन CBG बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना के लिए नगर निगम ने करीब 128 करोड़ का टेंडर भी जारी किया है। यह प्रोजेक्ट DBFOT (Design-Build-Finance-Operate-Transfer) मॉडल पर 20 साल की कंसेशन अवधि के लिए प्रस्तावित है।
प्लांट में CBG बनाने के लिए शहर के घरों, सब्जी मंडियों, डेयरी और गोबर से मिलने वाले जैविक कचरे का इस्तेमाल किया जाएगा। इस कचरे से पहले बायोगैस तैयार की जाएगी। इसके बाद गैस को शुद्ध कर कंप्रेस्ड बायोगैस में बदला जाएगा।
हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में गीले कचरे के साथ आने वाला गैर-जैविक कचरा चुनौती बन सकता है। कचरा वाहनों में प्लास्टिक, मिट्टी और दूसरी इनर्ट सामग्री भी पहुंचती है। इसलिए प्लांट संचालक को प्रोसेसिंग से पहले कचरे की छंटाई करनी होगी।
RFP में यह शर्त रखी गई है कि प्लांट में आने वाले फीडस्टाक में 20 % से ज्यादा इनर्ट सामग्री नहीं होनी चाहिए। प्लास्टिक और रिसाइकिल होने वाली सामग्री को फीडस्टाक में शामिल नहीं किया जाएगा।
भोपाल शहर से प्रतिदिन करीब 850 टन कचरा निकलता है। इसमें लगभग 400 टन गीला और 450 टन सूखा कचरा शामिल है। आदमपुर में प्रस्तावित प्लांट की क्षमता इसी 400 टन प्रतिदिन गीले कचरे को प्रोसेस करने की होगी।
वहीं, आदमपुर कचरा खंती में लंबे समय से कचरा जमा होने के कारण करीब 7 लाख टन कचरा एकत्र हो चुका है। ऐसे में प्रस्तावित प्लांट से एक तरफ गीले कचरे का इस्तेमाल ऊर्जा उत्पादन में होगा, वहीं दूसरी तरफ खंती में पहुंचने वाले कचरे का दबाव कम होने की उम्मीद है।
आदमपुर में गीले कचरे से CBG बनाने की योजना नगर निगम ने करीब छह साल पहले भी शुरू की थी। उस समय एवर इंवायरो को इसका टेंडर दिया गया था। हालांकि, कंपनी छह साल बाद भी परियोजना पर काम शुरू नहीं कर सकी।
निर्धारित अवधि में काम शुरू नहीं होने के बाद नगर निगम ने कंपनी का अनुबंध समाप्त कर दिया। अब नए टेंडर के जरिए इस परियोजना को दोबारा शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
यह भी पढ़ें- बदल जाएगी सागर के एरण की सूरत! केंद्र सरकार की योजना से बनेगा 'लिविंग कल्चरल स्पेस', Tourists को मिलेगा अनोखा अनुभव