
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा 15,000 से बढ़ाकर 25,000 प्रतिमाह करने के निर्णय से देश के लाखों कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा व्यापक हुआ है।
इस निर्णय से देशभर में 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज के दायरे में आने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के दो लाख कर्मचारी इस दायरे में आ सकते हैं। अभी दोनों राज्यों में ईपीएफ की कैटेगरी में आने वाले कर्मचारियों की संख्या 26 लाख से अधिक है। देशभर में 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
वेतन सीमा में यह वृद्धि बदलते वेतन स्तर, आय में वृद्धि तथा औपचारिक रोजगार के लगातार विस्तार को ध्यान में रखते हुए की गई है। ईपीएफओ की वेतन सीमा वर्ष 2004 से 2014 तक अपरिवर्तित रही थी और सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 प्रतिमाह किया गया था। पिछले वर्षों में वेतन एवं न्यूनतम मजदूरी के स्तर में हुई वृद्धि को देखते हुए अब इसे 25,000 प्रतिमाह किया गया है।
नई सीमा से 15,000 से 25,000 प्रतिमाह वेतन पाने वाले पात्र कर्मचारियों को वैधानिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि बचत, सेवानिवृत्ति सुरक्षा, पेंशन तथा बीमा सुरक्षा का दायरा विस्तृत होगा।
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यह निर्णय रोजगार के औपचारीकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ श्रमिकों की दीर्घकालिक सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज से कर्मचारियों को औपचारिक रोजगार से जुड़े लाभ प्राप्त होंगे तथा नियोक्ताओं के लिए भी कर्मचारी प्रतिधारण और कार्यबल स्थिरता को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है।
आंचलिक कार्यालय, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ द्वारा इस निर्णय के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए विशेष जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।