
मोहम्मद अबरार खान, नवदुनिया। भोपाल के ज्यादातर लोग भदभदा को बड़े तालाब से जोड़कर देखते हैं, जहां बारिश के दिनों में भदभदा के गेट खुलने का नजारा देखने शहरवासी पहुंचते हैं। लेकिन विदिशा रोड पर भोपाल से करीब 22 किलोमीटर दूर एक और भदभदा है, जो अपने खूबसूरत झरने और ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन के लिए जाना जाता है। बारिश के मौसम में यहां बहते झरने को देखने बड़ी संख्या में पर्यटक और प्रकृति प्रेमी पहुंचते हैं। भोपाल-विदिशा रेल खंड पर स्थित भदभदा घाट रेलवे स्टेशन (बीवीबी) अब जल्द ही इतिहास का हिस्सा बनने जा रहा है।
यह स्टेशन सूखी सेवनिया (एसयूडब्लु) और दीवानगंज (डीडब्लुजी) के बीच स्थित है। प्राकृतिक वादियों, जंगल और बलुआ पत्थर की पहाड़ियों से घिरे इस छोटे से स्टेशन की खूबसूरती रेल यात्रियों के साथ फोटोग्राफरों और प्रकृति प्रेमियों को भी आकर्षित करती है।
रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी नवल अग्रवाल के बताया कि इस रेल मार्ग पर आधुनिक ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम लगाने का काम चल रहा है। काम पूरा होने के बाद भदभदा घाट स्टेशन स्वतः ही हो जाएगा। उनके अनुसार ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम लागू होने के बाद ट्रेनों के संचालन में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा। स्टेशन मास्टर या केबिन स्टाफ को पहले की तरह मैनुअल सिग्नल देने की जरूरत नहीं होगी।
इससे ट्रेनों की रफ्तार और सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही कम यात्री संख्या वाले छोटे स्टेशनों पर रखे जाने वाले स्टाफ और रखरखाव का खर्च भी कम होगा। बताया जाता है कि जनवरी 1889 में ब्रिटिश शासन के दौरान इंडियन मिडलैंड रेलवे ने झांसी-भोपाल ब्रॉडगेज रेल लाइन की शुरुआत की थी। इसी दौर में भदभदा घाट स्टेशन भी अस्तित्व में आया। पहाड़ियों, घने पेड़ों और घुमावदार रेल लाइन के बीच होने के कारण यह स्टेशन शुरू से ही अपनी अलग पहचान रखता रहा है।
अग्रवाल बताते हैं कि यहां अब कोई रेल नहीं रुकती है न यहां से किसी प्रकार का टिकिट दिए जाने की व्यवस्था है। जो भी रेल रुकती हैं तो वे परिचालन दृश्टी से रुकती हैं। स्टेशन बंद होने के बाद इन ट्रेनों का ठहराव भी खत्म हो जाएगा और यह जगह सामान्य रेल लाइन का हिस्सा ही रहेगी।
भदभदा गांव और आसपास के ग्रामीणों के लिए यह स्टेशन भोपाल और बीना आने-जाने का सस्ता और आसान साधन रहा है। स्टेशन बंद होने से ग्रामीणों को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
वहीं स्थानीय लोगों और पर्यटकों का कहना है कि आधुनिक तकनीक जरूरी है, लेकिन इसके साथ ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत को भी बचाया जाना चाहिए। अगर भदभदा घाट स्टेशन और इसके आसपास के झरने को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित और संरक्षित किया जाए तो यह क्षेत्र ग्रामीणों के लिए रोजगार और आजीविका का साधन पैदा कर सकता है।
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स्थानीय लोगों के अनुसार स्टेशन के पास बहने वाले विशाल झरने का पानी जब नीचे गिरता है तो उससे ‘भद-भद’ जैसी आवाज निकलती है। इसी आवाज के आधार पर इस जगह का नाम भदभदा पड़ा। बाद में गांव और रेलवे स्टेशन का नाम भी भदभदा घाट ही रखा गया। बारिश के मौसम में झरने का तेज बहाव और आसपास की पहाड़ियों का नजारा इसे भोपाल के नजदीक एक खास प्राकृतिक स्थल बना देता है।