
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में 500 वर्ग मीटर (5,381.96 वर्गफीट) तक के आवासीय भूखंडों (स्वीकृत लेआउट वाले) पर निर्माण के लिए अब नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय (टीएंडसीपी) से अलग से योजना विकास अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। सीधे स्थानीय निकाय से ही भवन निर्माण अनुमति मिल जाएगी।
200 वर्ग मीटर (2150 वर्गफीट) तक के आवासीय भूखंडों पर भवन निर्माण के लिए स्वघोषणा पत्र और ऑनलाइन शुल्क जमा करते ही भवन निर्माण की अनुमति मिल जाएगी। शुल्क जमा करते समय कोई डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन नहीं किया जाएगा, लेकिन छह माह के अंदर औचक निरीक्षण होगा, इसमें अगर प्लान या कंस्ट्रक्शन नियमों का उल्लंघन मिलता है तो अनुमति रद्द कर दी जाएगी।
प्राधिकृत आर्किटेक्ट और स्ट्रक्चरल इंजीनियर 300 वर्ग मीटर तक के आवासीय भूखंडों पर सीधे बिल्डिंग परमिशन (भवन अनुमति) जारी कर सकेंगे। उन्हें आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर इस पर निर्णय लेना होगा। हालांकि, वे खुद के प्लॉट के लिए या प्लॉट बेचने वाले कॉलोनाइजरों को ऐसी अनुमति जारी नहीं कर सकेंगे।
आवेदन के साथ नक्शे और सभी दस्तावेज पूरी तरह से ऑनलाइन जमा किए जाएंगे। सभी लाइसेंस और स्वीकृत नक्शे डिजिटल सिग्नेचर से प्रमाणित होंगे और शुल्क का भुगतान भी ऑनलाइन माध्यम से ही होगा। मप्र एकीकृत भूमि विकास और भवन संवर्धन नियम-2026 के ड्राफ्ट (प्रस्तावित प्रारूप) में इसका प्रावधान किया गया है।
यह नया नियम, मप्र भूमि विकास नियम-2012 की जगह लेगा। प्लॉटों के विभाजन की प्रक्रिया भी मर्जर जैसी ही होगी, लेकिन शर्त यह है कि विभाजन के बाद बनने वाले किसी भी नए भूखंड का आकार 500 वर्ग मीटर से कम नहीं होना चाहिए।
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60 मीटर की बिल्डिंग के लिए कम से कम 30 मीटर की सड़क और कम से कम 3,000 वर्गमीटर का प्लॉट जरूरी किया गया है। बेस से ऊपर का एफएआर खरीदा जा सकता है, जिनमें आधा प्रीमियम एफएआर के तौर पर, जिसकी कीमत मौजूदा कलेक्टर गाइडलाइन रेट का 20 प्रतिशत है और आधा ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स के तौर पर खरीदा जा सकेगा।
ग्रीन-रेटेड बिल्डिंग सर्टिफिकेशन के बाद तीन से पांच प्रतिशत ज्यादा एफएआर मिलेगा। ऊंची बिल्डिंग के लिए एक कमेटी से साइट क्लियरेंस और फायर डिपार्टमेंट की मंजूरी जरूरी होगी।