राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में घर या व्यावसायिक भवन बनाने के लिए अनुज्ञा (बिल्डिंग परमिशन) लेने की प्रक्रिया अब अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध होने जा रही है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस दिशा में एक बड़ी राहत देते हुए विभिन्न विभागों से लिए जाने वाले अनापत्ति प्रमाण-पत्रों ( एनओसी ) की अनिवार्यता की समीक्षा की है और अनावश्यक एनओसी की बाध्यता को पूरी तरह समाप्त करने के निर्देश जारी किए हैं।
इस नई व्यवस्था के लागू होने से नागरिकों, निवेशकों और निर्माण एजेंसियों को प्रक्रियागत देरी से बड़ी राहत मिलेगी और प्रदेश में शहरी विकास गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
एनओसी नियमों में किए गए 4 बड़े बदलाव
1. इन तीन विभागों से एनओसी की अनिवार्यता पूर्णतः समाप्त
विभाग ने वर्तमान में लागू 12 प्रकार की एनओसी की व्यापक समीक्षा करने के बाद तीन प्रमुख अनापत्ति प्रमाण-पत्रों की अनिवार्यता को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब भवन निर्माण अनुज्ञा के मामलों में नागरिकों को तीन विभागों के चक्कर नहीं काटने होंगे।
- सहकारिता विभाग / गृह निर्माण सहकारी समिति से एनओसी
- विद्युत विभाग से एनओसी
- नजूल अनापत्ति प्रमाण-पत्र (नजूल एनओसी)
2. तीन एनओसी के स्थान पर अब सिर्फ 'स्व-घोषणा'
प्रक्रिया को और सुगम बनाने के लिए तीन अन्य एनओसी के स्थान पर अब 'स्व-घोषणा' की व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके साथ ही ऑनलाइन सत्यापन प्रणाली भी विकसित की जा रही है। यह व्यवस्था निम्नलिखित क्षेत्रों में लागू होगी:
- रक्षा प्रतिष्ठान ( डिफेंस एस्टेबलिशमेंट )
- मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ( एमपी हाउसिंग बोर्ड )
- विभिन्न विकास प्राधिकरण ( डेवलपमेंट अथॉरिटी )
3. विशेष परिस्थितियों में ऑटोमेटेड सिस्टम से जांच
तीन अन्य विशिष्ट विभागों से संबंधित एनओसी प्रक्रिया को केवल आवश्यक होने की स्थिति में ही तकनीक के माध्यम से ऑटोमेटेड आधार पर सिस्टम द्वारा चेक किया जाएगा। जरूरत होने पर ही इसकी मांग की जाएगी:
- एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया
- राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण
- विरासत/धरोहर विभाग
4. शेष तीन प्रक्रियाओं का सरलीकरण
बचे हुए अन्य तीन अनापत्ति प्रमाण-पत्रों को प्राप्त करने की प्रक्रिया को भी पहले से अधिक स्पष्ट, सरल और सुव्यवस्थित बनाया गया है ताकि कहीं भी फाइलें अनावश्यक रूप से न अटकें।
आम जनता और निवेशकों को क्या होगा फायदा?
त्वरित निराकरण और समय की बचत: विकास एवं भवन निर्माण के प्रकरणों का निराकरण अब तय समय-सीमा में तेजी से हो सकेगा।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: अनावश्यक एनओसी की बाध्यता खत्म होने से रियल एस्टेट सेक्टर और व्यापारिक निर्माण में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही: ऑनलाइन सत्यापन और नियमों के स्पष्टीकरण से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी व उत्तरदायी बनेगी।
विभाग का रुख
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अनुसार, अब भवन निर्माण अनुज्ञा प्रकरणों में केवल उन्हीं विभागों से एनओसी ली जाएगी, जिनका प्रावधान संबंधित अधिनियमों, नियमों या शासन के प्रचलित निर्देशों में स्पष्ट रूप से दर्ज है। मनमाने स्तर पर एनओसी की मांग अब नहीं की जा सकेगी।