
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में बस किराए में की गई वृद्धि कम की जा सकती है। दरअसल, विभिन्न जिलों के प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को जनता से फीडबैक मिला है कि राज्य सरकार द्वारा बस किराए में अधिक वृद्धि कर दी गई है। इससे कमजोर वर्ग असहज महसूस कर रहा है। कई जिलों से एक जैसा फीडबैक मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग से कहा है कि बस किराए में वृद्धि की एक बार फिर समीक्षा की जाए। इसमें निजी ऑपरेटरों का भी ध्यान रखा जाए। उन्हें किसी तरह का आर्थिक नुकसान न हो, इसका ध्यान रखते हुए किराया वृद्धि का युक्तियुक्तकरण किया जाए।
सरकार का प्रयास है कि आम जनता, विशेषकर कमजोर वर्ग पर आर्थिक बोझ न पड़े और निजी बस ऑपरेटरों के हित भी सुरक्षित रहें। हाल ही में हुई 60 प्रतिशत तक की किराया वृद्धि के बाद मुख्यमंत्री ने यह संवेदनशील फैसला लिया है।
हाल ही में शुरू की गई मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के व्यापक विस्तार के साथ-साथ यदि निजी बसों के किराए का भी युक्तियुक्तकरण हो जाता है, तो प्रदेश की करीब 8.5 करोड़ जनता के लिए आवागमन बेहद सुगम और सस्ता हो जाएगा। बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव लगातार प्रदेश के विभिन्न जिलों के दौरों और प्रवास पर हैं। इस दौरान वह विकास कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ सीधे आम जनता और समाज के विभिन्न तबकों से संवाद कर रहे हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में करीब पांच साल के लंबे अंतराल के बाद बस किराए में बड़ी बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई थी। निजी बस ऑपरेटरों की ओर से डीजल, स्पेयर पार्ट्स, टोल टैक्स और वाहन रखरखाव के खर्चों में हुई वृद्धि का हवाला देते हुए हड़ताल और किराया बढ़ाने की मांग की जा रही थी। जिसके बाद इसी वर्ष अगस्त के पहले सप्ताह में सामान्य यात्री बसों का किराया 1.25 रुपये से बढ़ाकर दो रुपये प्रति किलोमीटर कर दिया।
बिना एसी वाली डीलक्स बसों का किराया सामान्य बसों से 25 प्रतिशत और एसी डीलक्स बस का 50 प्रतिशत अधिक रखा गया है। सर्वाधिक किराया सुपर लग्जरी कोच (एसी) का रखा गया है, जो सामान्य बसों से 75 प्रतिशत अधिक है। जिसके तहत एसी लग्जरी के नाम पर 3.50 रुपये प्रति किलोमीटर तक किराया लिया जा सकता है। न्यूनतम किराया 10 रुपये रखा गया है, जो पहले सात रुपये था।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद परिवहन विभाग किराया वृद्धि के युक्तियुक्तकरण के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार कर रहा है। इसके तहत विभाग जल्द ही मध्य प्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन और निजी बस ऑपरेटरों के प्रतिनिधियों के साथ एक विशेष बैठक आयोजित करेगा। सरकार का मानना है कि एकतरफा निर्णय लेने के बजाय ऑपरेटरों से सीधे सुझाव मांगे जाएं, ताकि व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके।
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