
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। गैस पीड़ितों के लिए निश्शुल्क इलाज की व्यवस्था के बावजूद कैंसर के दर्द से परेशान गैस पीड़ित महिला नूरजहां को अस्पताल की इमरजेंसी में तत्काल मुफ्त उपचार नहीं मिल सका। नूरजहां गैस पीड़ित के रूप में पंजीकृत हैं और उनके पास गैस राहत विभाग का कार्ड होने के साथ आयुष्मान कार्ड भी है। महिला का कहना है कि दोनों कार्ड होने के बावजूद उन्हें उपचार के लिए बाहर से खर्च करना पड़ा।
नूरजहां के अनुसार, कैंसर के कारण तेज दर्द होने पर वह कैंसर अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचीं। कार्ड दिखाने के बाद भी तत्काल निश्शुल्क उपचार नहीं मिला। उनका कहना है कि आयुष्मान योजना के तहत सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांच भी तत्काल नहीं हो पाती हैं। कर्मचारियों ने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत उपचार का अप्रूवल आने में 24 से 48 घंटे लग सकते हैं।
गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाली समाजसेविका रचना ढींगरा ने कहा कि गंभीर बीमारी और इमरजेंसी की स्थिति में मरीज को योजना के अप्रूवल का इंतजार नहीं करना चाहिए। गैस पीड़ितों के पास गैस राहत का कार्ड होने के बावजूद यदि उन्हें तत्काल इलाज के लिए अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा है, तो इस व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मरीजों को योजनाओं के बीच उलझने के बजाय समय पर उपचार मिलना चाहिए। इस मामले में सवाल उठ रहा है कि गैस पीड़ित और आयुष्मान दोनों कार्ड रखने वाले मरीज को इमरजेंसी में उपचार के लिए किस योजना के तहत तत्काल सुविधा मिलेगी।
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