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एमपी में मेट्रोपोलिटन रीजन के रूप में विकसित होंगे शहर; भोपाल के बाद जबलपुर, ग्वालियर, इंदौर को मास्टर प्लान का इंतजार

भोपाल के इस मास्टर प्लान से प्रदेश में इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर की शहर विकास योजना की राह भी आसान हुई है।

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 27 Sep 2026 09:03:10 PM (IST)Updated Date: Sun, 27 Sep 2026 09:03:10 PM (IST)
एमपी में मेट्रोपोलिटन रीजन के रूप में विकसित होंगे शहर; भोपाल के बाद जबलपुर, ग्वालियर, इंदौर को मास्टर प्लान का इंतजार
भोपाल के बाद अन्य शहरों का मास्टर प्लान जल्द। (AI Generated Image)

HighLights

  1. भोपाल के बाद अन्य शहरों का मास्टर प्लान जल्द
  2. मेट्रोपोलिटन रीजन के रूप में विकसित होंगे शहर
  3. जानिए मध्य प्रदेश के बड़े शहरों की वर्तमान स्थिति

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। वर्ष 2005 से लंबित भोपाल मास्टर प्लान (शहर विकास योजना) का ड्राफ्ट अंततः जारी कर दिया गया है। एक माह तक दावे-आपत्ति लेने के बाद फाइनल मास्टर प्लान लागू कर दिया जाएगा। भोपाल के इस मास्टर प्लान से प्रदेश में इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर की शहर विकास योजना की राह भी आसान हुई है। इन शहरों के आमजन में आस जागी है कि भोपाल के बाद यहां का मास्टर प्लान भी जल्द लागू कर दिया जाएगा।

अन्य शहरों को लिए भी चल रही है मास्टर प्लान की तैयारी

बता दें कि इंदौर और जबलपुर की विकास योजनाओं के पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन सरकार ने समय-सीमा बताने में असमर्थता जताई थी। जबलपुर और ग्वालियर को मेट्रोपोलिटन रीजन के रूप में विकसित करने की सरकारी तैयारी है।


ऐसे में इन शहरों के लिए सिर्फ शहर सीमा ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों और कस्बों को जोड़कर लैंड यूज, ट्रांसपोर्ट, रिंग रोड, आवास, उद्योग, ड्रेनेज और ग्रीन एरिया का दीर्घकालिक प्लान बनाया जाना प्रक्रियाधीन है।

सागर और उज्जैन के मास्टर प्लान तैयार, अपडेट किए जा रहे

सागर, सतना और रीवा के पुराने विकास प्लान की समय-सीमा भी समाप्त हो चुकी है। सागर और उज्जैन के मास्टर प्लान तैयार किए जा चुके हैं। अब इन्हें विजन 2047 के तहत अपडेट किया जा रहा है। मास्टर प्लान न होने से इन शहरों का अनियोजित विकास हो रहा है। एनजीटी सहित अन्य न्यायालयों में शहरों के विकास से जुड़े कई प्रकरण विचाराधीन हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कह चुके हैं कि अन्य शहरों का मास्टर प्लान जल्द लाया जाएगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे का कहना है कि अन्य शहरों के मास्टर प्लान को लेकर भी प्रक्रिया चल रही है।

मप्र के प्रमुख शहरों में मास्टर प्लान की स्थिति

  • भोपाल: राजधानी भोपाल का पिछला पूर्ण वैधानिक मास्टर प्लान 1995 में अधिसूचित किया गया था, जिसकी अवधि दिसंबर 2005 में ही समाप्त हो गई थी। लंबे इंतजार के बाद सरकार ने भोपाल विकास योजना (मास्टर प्लान) 2047 का नया ड्राफ्ट राजपत्र में प्रकाशित कर जनता से आपत्तियां मांगी हैं।
  • इंदौर: इंदौर का पिछला मास्टर प्लान एक जनवरी 2008 से लागू हुआ था, जिसकी समय अवधि 31 मार्च 2021 को समाप्त हो गई। वर्तमान में इसके नए विजन-2047 मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर काम चल रहा है।
  • जबलपुर: जबलपुर के पिछले मास्टर प्लान की अवधि भी वर्ष 2008 से शुरू होकर वर्ष 2021 तक के लिए थी। यह अवधि खत्म होने के बाद अब नया मास्टर प्लान वर्ष 2047 के अनुरूप बनाया जा रहा है।
  • ग्वालियर: ग्वालियर के लिए इससे पहले मास्टर प्लान 2005 और उसके बाद संशोधित मास्टर प्लान 2021 प्रभावी था, जिसकी अवधि वर्ष 2021 में समाप्त हो गई। अब ग्वालियर का नया मास्टर प्लान-2035 प्रस्तावित है।

शहर का मास्टर प्लान इसलिए होता है महत्वपूर्ण

नगरीय विकास एवं आवास विभाग से सेवानिवृत्त पूर्व संयुक्त संचालक हिमांशु सिंह कहते हैं कि शहर का मास्टर प्लान बेहद महत्वपूर्ण होता है। कुछ शहरों में मास्टर प्लान न होने से शहरी विकास पूरी तरह अनियोजित हो जाता है। इससे नागरिकों के जीवन, बुनियादी ढांचे और पर्यावरण पर गंभीर तथा दूरगामी दुष्प्रभाव पड़ता है।

बिना किसी योजना के शहरों में रिहायशी, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच की सीमाएं खत्म हो जाती हैं। लोग आवासीय क्षेत्रों में कारखाने या दुकान खोल देते हैं। गलियां तंग हो जाती हैं, पार्किंग के लिए स्थान निर्धारित नहीं हो पाता है तथा सार्वजनिक परिवहन के लिए जगह चिह्नित नहीं हो पाती है।

यह भी पढ़ें- एमपी में मतदाता सूचियों में 27.4 लाख का अंतर, निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस कराएगी घर-घर सत्यापन

मास्टर प्लान होता है भविष्य का खाका

बिना प्लानिंग के कॉलोनियां कटती हैं, जिससे प्राकृतिक नालों, तालाबों और वाटर बॉडी पर अतिक्रमण कर लिया जाता है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बिजली, पानी की सप्लाई और सीवरेज लाइन जैसी आवश्यक सेवाएं पंगु हो जाती हैं।

कचरा प्रबंधन और ठोस अपशिष्ट के निपटारे के लिए डंपिंग या रीसाइक्लिंग यार्ड आरक्षित नहीं हो पाता है। अवैध कॉलोनियां बसने लगती हैं। जबकि मास्टर प्लान में भविष्य की आबादी को ध्यान में रखकर सड़कों की चौड़ाई और ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का खाका खींचा जाता है।