CM Rise School News: सीएम राइज स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी, कुछ जगह नहीं भर पाई 100 प्रतिशत सीटें
राजधानी भोपाल में आठ सीएम राइज स्कूल संचालित हैं। इनमें से दो स्कूलों में उपलब्ध सीटों के मुकाबले प्रवेश के लिए कम आवेदन आए। ...और पढ़ें
By Ravindra SoniEdited By: Ravindra Soni
Publish Date: Sat, 18 Feb 2023 07:11:20 AM (IST)Updated Date: Sat, 18 Feb 2023 07:11:20 AM (IST)

भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। सीएम राइज स्कूलों में प्रवेश के लिए एक से 15 फरवरी तक आवेदन प्रक्रिया जारी रही। राजधानी में आठ सीएम राइज स्कूल हैं। इनमें कुछ स्कूलों में सीटों से अधिक आवेदन आए हैं तो कुछ स्कूलों में सीटों के मुकाबले काफी कम फार्म जमा हुए हैं। जिन स्कूलों में कम आवेदन आए हैं, उनमें फिर से आवेदन के लिए प्राचार्य विभागीय अधिकारियों को पत्र लिखेंगे। वहीं जिन स्कूलों में अधिक आवेदन हुए हैं। उन स्कूलों में लाटरी निकालकर विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया।
ये हैं राजधानी के सीएम राइज स्कूल
राजधानी में शासकीय बालक उमावि बैरसिया, शासकीय हाईस्कूल बर्रई, कमला नेहरू शासकीय कन्या उमावि, शासकीय कन्या उमावि गोविंदपुरा, महात्मा गांधी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, शासकीय उमावि निशातपुरा और शासकीय उमावि बरखेड़ी रशीदिया स्कूल का सीएम राइज स्कूल के तौर पर चयन किया गया है।
केजी-1 की 18 सीटें खाली
शासकीय हाईस्कूल बर्रई की प्राचार्य शबिहा अली ने बताया कि केजी वन में 20 सीटों के लिए सिर्फ दो ही आवेदन आए थे। अभी अंग्रेजी व हिंदी दोनों कक्षाओं में सीटें पूरी खाली हैं। स्कूल में कक्ष नहीं है। इस कारण अभिभावक प्रवेश नहीं दिलाना चाह रहे हैं। वहीं शासकीय बालक उमावि बैरसिया में भी केजी-1 में सीटों के मुताबिक कम आवेदन आए हैं।
लाटरी निकालकर प्रवेश दिया गया
वहीं रशीदिया स्कूल और महात्मा गांधी स्कूल में उपलब्ध सीटों से अधिक आवेदन आए थे। यहां पर लाटरी निकालकर प्रवेश दिए गए हैं। रशीदिया स्कूल में केजी-वन में 25 सीटों के लिए 26 आवेदन आए थे। वहीं पहली कक्षा में 16 सीटों के लिए 22 आवेदन आए थे। इसी तरह महात्मा गांधी स्कूल में भी लाटरी निकालकर प्रवेश दिए गए। कमला नेहरू में हिंदी माध्यम में सभी सीटें भर गई हैं, जबकि अंग्रेजी माध्यम में कुछ सीटें खाली हैं।
सभी स्कूलों में बैठक व्यवस्था को देखकर प्राचार्य को विद्यार्थियों के प्रवेश लेने के निर्देश दिए गए हैं। अगर कुछ स्कूलों में सीटें खाली रह गई हैं तो नियम के तहत प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
- नितिन सक्सेना, जिला शिक्षा अधिकारी, भोपाल