
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी भोपाल में कड़ाके की ठंड जानलेवा साबित हो रही है। कम तापमान का सीधा असर लोगों के दिल और दिमाग पर देखने को मिल रहा है।
बीते एक महीने में सरकारी और प्रमुख निजी अस्पतालों में हार्ट अटैक के 406 से अधिक और ब्रेन स्ट्रोक के 220 से ज्यादा मरीज भर्ती हुए हैं। इस दौरान कुल 56 लोगों की जान चली गई, जिससे स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सक दोनों ही चिंतित हैं।
ठंड बढ़ते ही हमीदिया अस्पताल और एम्स भोपाल जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में मरीजों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले लगभग दोगुनी हो गई है।
हमीदिया अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आयुष दुबे के अनुसार, पहले जहां रोजाना औसतन तीन ब्रेन स्ट्रोक के मरीज आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर छह तक पहुंच गई है।
वहीं एम्स भोपाल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भूषण शाह बताते हैं कि प्रतिदिन छह से सात हार्ट अटैक के केस सामने आ रहे हैं, जिनमें 30 से 50 वर्ष की उम्र के युवा भी शामिल हैं।
ब्रेन स्ट्रोक - 220 से अधिक मरीज, 33 मौतें
हार्ट अटैक - 406 से अधिक मरीज, 23 मौतें
कुल मरीज - 626 से ज्यादा, कुल मौतें: 56
विशेषज्ञों के मुताबिक सर्दी में शरीर में होने वाले दो बड़े बदलाव इस खतरे को बढ़ा रहे हैं।
पहला, तापमान गिरने से खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे नसों में थक्के बनने की आशंका बढ़ जाती है।
दूसरा, ठंड में नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और दिल व दिमाग पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक स्टडी के अनुसार, तापमान में सिर्फ 1 डिग्री सेल्सियस की गिरावट से हार्ट अटैक के मामलों में 1.6 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि छाती में जकड़न, सांस फूलना या अचानक कमजोरी जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें।
डॉ. आयुष दुबे बताते हैं कि ब्रेन स्ट्रोक के मरीज के लिए शुरुआती 4.5 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में सही इलाज मिलने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है और लकवे जैसी गंभीर स्थिति से भी बचाव संभव है।
सुबह बहुत जल्दी ठंड में टहलने से बचें।
ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीज नियमित जांच कराएं।
शरीर को गर्म रखने के लिए परतों में कपड़े पहनें।
सीने में दर्द, भारीपन या अचानक असहजता महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
ठंड के इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है, इसलिए सतर्कता और समय पर इलाज ही सबसे बड़ा बचाव है।