
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में मंगलवार को उस वक्त एक बेहद हाई-प्रोफाइल और नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला, जब राज्यसभा चुनाव के लिए बेंगलुरु जा रहे कांग्रेस विधायकों के कदम ऐन वक्त पर भोपाल एयरपोर्ट के रनवे से वापस लौट आए। मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर मचे घमासान के बीच, कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त होते ही प्रदेश की राजनीतिक हलचल सातवें आसमान पर पहुंच गई है।

इस पूरी सियासी उठापटक का केंद्र बिंदु भोपाल राजाभोज एयरपोर्ट का वो रनवे बना, जहां विशेष विमान में सवार हो चुके कांग्रेस विधायकों को ऐन वक्त पर वापस उतरना पड़ा।
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे चौंकाने वाली तस्वीर भोपाल एयरपोर्ट से सामने आई। तीसरी सीट पर भाजपा द्वारा प्रत्याशी उतारे जाने के बाद कांग्रेस अपने कुनबे को एकजुट रखने और किसी भी तरह के 'वोट कटने' के डर से अपने विधायकों को भोपाल से बाहर शिफ्ट कर रही थी। इसके लिए कांग्रेस द्वारा एक 75 सीटर विशाल चार्टर्ड विमान बुक किया गया था, जिससे कुल 68 विधायकों को बेंगलुरु भेजा जाना था।

रणनीति के तहत 38 विधायक विशेष विमान में सवार होने के लिए रनवे तक पहुंच भी चुके थे। लेकिन जैसे ही मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने की खबर आई, पूरी बिसात पलट गई। विशेष विमान से बेंगलुरु जाने के लिए रवाना हो रहे इन कांग्रेस विधायकों को वापस भोपाल रनवे पर आना पड़ा और विमान की उड़ान को फिलहाल रोकना पड़ा।
जब विधायक विमान में सवार हो रहे थे, उसी दौरान महानिदेशक नागरिक उड्डयन (DGCA) की कुछ जरूरी तकनीकी औपचारिकताओं के कारण उन्हें वहां रोक दिया गया। ऐन वक्त पर लगी इस रोक से एयरपोर्ट पर हड़कंप मच गया। नटराजन का नामांकन निरस्त होने की खबर से पहले से ही तनाव में चल रहे कांग्रेस विधायकों को एक पल के लिए ऐसा लगा कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं या सरकार के इशारे पर रोका जा रहा है।

हालांकि, यह पूरी तरह से एक तकनीकी प्रक्रिया थी। एयरपोर्ट डायरेक्टर रामजी अवस्थी के अनुसार, कुछ ही देर में डीजीसीए से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गईं और विमान को जाने की अनुमति मिल गई। लेकिन तब तक नटराजन के फॉर्म रिजेक्ट होने की खबर ने पूरी कहानी बदल दी थी।
इस पूरे सियासी ड्रामे और विधायकों के यू-टर्न की मुख्य वजह कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन का खारिज होना रहा। दरअसल, नटराजन ने हैदराबाद की एक अदालत में चल रहे एक विचाराधीन मामले की जानकारी अपने नामांकन पत्र के साथ जमा किए गए हलफनामे (शपथ पत्र) में नहीं दी थी।

भाजपा ने मंगलवार को इसी कानूनी खामी को पकड़ते हुए निर्वाचन अधिकारी के समक्ष आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई थी। जांच के बाद निर्वाचन अधिकारी ने इस आपत्ति को सही पाया और मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया। इसके बाद से ही कांग्रेस खेमे में खलबली मच गई और बेंगलुरु जा रहे विधायकों के पहिए रनवे पर ही थम गए। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस कानूनी झटके के बाद कांग्रेस आलाकमान का अगला कदम क्या होता है।
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