
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए हो रहे चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया है। नटराजन ने हैदराबाद के एक न्यायालयीन मामले की जानकारी नामांकन पत्र के साथ जमा किए गए शपथ पत्र में नहीं दी थी । इस पर भाजपा की ओर से मंगलवार को आपत्ति दर्ज की गई थी।
बदले घटनाक्रम के बाद भाजपा के तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और नटराजन के विरुद्ध खड़े हुए भाजपा प्रत्याशी महेश केवट का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है। संख्याबल के आधार पर दो सीट भाजपा को मिलनी थी और तीसरी कांग्रेस को। लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी के विरुद्ध भाजपा ने प्रत्याशी खड़ा कर मतदान की नौबत ला दी थी। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन पत्र में अपनी संपत्ति के बारे में भी जानकारियां छिपाई थीं, जिसके चलते उनका नामांकन पत्र निरस्त किया गया है।
बता दें कि भाजपा की ओर से दर्ज कराई गई आपत्ति में कहा गया थी कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन पत्र में तेलंगाना की एक अदालत में चल रहे मामले की जानकारी छुपाई है।
भाजपा के अनुसार, हैदराबाद की मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदालत में पूर्व कॉरपोरेटर ए. श्रीलता ने नटराजन के खिलाफ एक याचिका दायर कर रखी है। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि नटराजन ने कुंभम शिवकुमार रेड्डी नाम के एक व्यक्ति को राजनीतिक सर्वेक्षण का काम दिया था। इस बीच, श्रीलता ने रेड्डी पर छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है, जिससे यह पूरा विवाद जुड़ा हुआ है।
इस विवाद पर कांग्रेस पूरी तरह से अपनी उम्मीदवार के बचाव में उतर आई है। मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई एफआईआर या केस दर्ज नहीं है। उन्हें केवल कोर्ट की तरफ से एक नोटिस मिला है। सिंघार ने तर्क दिया कि नियमों के मुताबिक नामांकन पत्र में जानकारी तब देनी अनिवार्य होती है जब व्यक्ति पर कोई केस दर्ज हो, सिर्फ नोटिस मिलने पर नहीं।
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पार्टी की ओर से वरिष्ठ वकील जेपी धनोपिया ने भी निर्वाचन अधिकारी के सामने यही कानूनी तर्क रखा है कि महज कोर्ट नोटिस के आधार पर नामांकन को अवैध नहीं ठहराया जा सकता। फिलहाल, निर्वाचन अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं और सभी की निगाहें उनके अंतिम फैसले पर टिकी हैं।