जंजीरों में जकड़ा ज्ञानेश कुमार का मुखौटा: भोपाल में निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर अड़े कांग्रेसी; पुलिस से हुई झूमाझटकी
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर से जुड़े मुद्दों के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन सदन के घेराव का प्रयास किया।
Publish Date: Mon, 28 Sep 2026 08:20:20 PM (IST)Updated Date: Mon, 28 Sep 2026 08:26:37 PM (IST)
प्रदर्शन के दौरान एक कार्यकर्ता को हाथ में जंजीर बांधकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मुखौटा पहनाया। नईदुनिया।HighLights
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के विरोध में प्रदर्शन
- विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे को चोट लगने की बात सामने आई
- हाथ में जंजीर बांधकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मुखौटा पहनाया
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की गड़बड़ियों के विरोध में मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सोमवार को भोपाल में प्रदर्शन किया।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय - निर्वाचन सदन के घेराव के लिए प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर से सभी नेता कार्यकर्ताओं के साथ निकले लेकिन पुलिस ने व्यापम चौराहे पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इसे लांघने की बार-बार कोशिश की गई तो कार्यकर्ताओं को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वाटर कैनन का उपयोग करना पड़ा।
इस दौरान पुलिस बल के साथ झूमाझटकी भी हुई, जिसमें विधानसभा में उपनेता हेमंत कटारे को चोट लग गई।
हाथ में जंजीर और ज्ञानेश कुमार का मुखौटा
प्रदर्शन के दौरान एक कार्यकर्ता को हाथ में जंजीर बांधकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मुखौटा पहनाया। जीतू पटवारी और उमंग सिंघार उसे पकड़कर ले जाते नजर आए।
काफी देर तक प्रदर्शन के बाद पुलिस ने जीतू पटवारी सहित अन्य कार्यकर्ताओं को पहले से खड़ी बसों में बैठाया और ले जाने लगे तो कार्यकर्ता सामने लेट गए। कुछ देर बाद सब लौट गए।
आरोप- 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे
निर्वाचन कार्यालय के घेराव से पहले प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर हुई सभा में पार्टी नेताओं ने चुनाव आयोग पर भाजपा के प्रकोष्ठ की तरह काम करने का आरोप लगाया।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पार्टी के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित अन्य नेताओं ने आरोप लगाया कि एसआईआर करके देशभर में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे किए गए हैं।
एसआईआर पर उठाए सवाल
दो चुनाव आयुक्तों ने एसआईआर से जुड़े निर्णयों पर 14 बार आपत्ति जताई लेकिन इन्हें दरकिनार किया गया। कानून में मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने का अधिकार ईआरओ को दिया गया है लेकिन आयोग ने पोर्टल के माध्यम से अधिकार स्वयं ले लिया।
निष्पक्ष जांच की मांग
उधर, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा कि किया कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 130 से 160 सीटें मिलने का माहौल था, लेकिन 65 सीटें ही मिलीं। एसआईआर में 42 लाख से अधिक वोट काटे गए। उनके अपने बूथ पर जहां भाजपा का कोई कार्यकर्ता नजर नहीं आ रहा था, वहां भी भाजपा को करीब 300 वोट मिले।
ऐसे सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि वोट चोरी की शुरुआत 2013 से हुई और सभी राजनीतिक दलों को बैलेट पेपर की मांग पर एकजुट होना चाहिए तो पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया ने ईवीएम से चुनाव होने पर बहिष्कार की बात कही।