बीमा क्लेम पर कोर्ट का बड़ा फैसला, कंपनी को देना होगा 9% ब्याज और ₹8000 की मानसिक क्षतिपूर्ति
MP News: जिला उपभोक्ता आयोग भोपाल ने स्वास्थ्य बीमा कंपनियों के अड़ियल रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 17 Jan 2026 03:36:56 PM (IST)Updated Date: Sat, 17 Jan 2026 03:36:56 PM (IST)
बीमा क्लेम पर कोर्ट का बड़ा फैसला।HighLights
- बीमा क्लेम पर कोर्ट का बड़ा फैसला।
- कंपनी को देना होगा 9% ब्याज।
- ₹8,000 की मानसिक क्षतिपूर्ति।
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। जिला उपभोक्ता आयोग भोपाल ने स्वास्थ्य बीमा कंपनियों के अड़ियल रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि बीमा कंपनियां केवल तकनीकी बारीकियों या अस्पताल के रिकॉर्ड में लिखावट जैसी छोटी विसंगतियों का बहाना बनाकर क्लेम खारिज नहीं कर सकतीं।
आयोग ने मणिपाल सिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी पर जुर्माना लगाते हुए पीड़ित को इलाज की राशि ब्याज समेत लौटाने का आदेश दिया है।
क्या था मामला?
भोपाल के गोविंदपुरा निवासी अमित मोटवानी ने अपनी पत्नी आरती के अपेंडिक्स के इलाज के लिए निजी अस्पताल में 38,634 रुपये खर्च किए थे। जब उन्होंने बीमा कंपनी से क्लेम मांगा, तो कंपनी ने यह कहते हुए आवेदन निरस्त कर दिया कि अस्पताल द्वारा भेजे गए TPR चार्ट (तापमान, नाड़ी, रक्तचाप और श्वसन दर) की लिखावट में विसंगतियां हैं। कंपनी ने इसे संदिग्ध मानकर भुगतान से इनकार कर दिया था।
आयोग की फटकार और फैसला
उपभोक्ता ने 4 जनवरी 2024 को आयोग की शरण ली। मामले की सुनवाई करते हुए आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी का यह कदम 'सेवा में कमी' (Deficiency in Service) है। आयोग ने आदेश दिया कि:
कंपनी इलाज के पूरे 38,634 रुपये लौटाए।
दावा पेश करने की तिथि से इस राशि पर 9% वार्षिक ब्याज दिया जाए।
उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए 8,000 रुपये अतिरिक्त भुगतान किए जाएं।
क्लेम खारिज हो तो क्या करें?
एडवोकेट कमल रुचि रमानी के अनुसार, यदि बीमा कंपनी गलत आधार पर क्लेम रोकती है, तो उपभोक्ताओं को ये कदम उठाने चाहिए।
- अस्पताल से डिस्चार्ज के समय डॉक्टर के नोट्स और मूल बिलों की कॉपी संभाल कर रखें।
- क्लेम रिजेक्ट होने पर कंपनी से लिखित में ठोस कारण मांगें।
- यदि कंपनी बात न सुने, तो जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करें।
- कागजी विसंगति के आधार पर नहीं रोक सकेंगे हेल्थ क्लेम।
- भोपाल उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी पर लगाया जुर्माना, पीड़ित को मिलेगा ब्याज सहित क्लेम।
- अस्पताल के रिकॉर्ड की लिखावट संदिग्ध बताकर क्लेम खारिज करना गैरकानूनी।