
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और बीमारी के गंभीर प्रकोप पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने इस प्रशासनिक विफलता को गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार को उच्च स्तरीय बैठक की और लापरवाह अधिकारियों पर बड़ी गाज गिराई है।
इंदौर में दूषित जल आपूर्ति के कारण फैले संक्रमण और मौतों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन एवं विकास) की रिपोर्ट के आधार पर निम्नलिखित सख्त निर्देश दिए हैं:
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी।
आज सुबह मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों के साथ इंदौर के दूषित पेयजल प्रकरण में राज्य शासन द्वारा की जा रही कार्रवाई की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन एवं विकास) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर भी चर्चा की।
इंदौर नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को इस…
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) January 2, 2026
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इंदौर में दूषित पेयजल प्रदाय से हुई दुखद घटना के संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने के उपरांत प्रदेश के अन्य स्थानों के लिए भी हम सुधारात्मक कदम उठा रहे हैं। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्यक्रम बनाने के निर्देश दिए हैं।
इस दृष्टि से सभी 16 नगर निगमों के महापौर, अध्यक्ष तथा आयुक्त एवं जिला कलेक्टर, स्वास्थ्य विभाग, नगरीय विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग व अन्य संबंधित मुख्यालय स्तर के अधिकारियों की आज सायं वर्चुअल बैठक बुलाई है, जिसमें पूरे प्रदेश की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।
इंदौर का भागीरथपुरा इलाके में प्रारंभिक जांच में पाया गया कि सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजर रही पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवर का पानी पेयजल में मिल गया था। अब तक इस घटना में 15 लोगों की मौत की खबर है (आधिकारिक आंकड़ा 4-10 के बीच), जबकि 272 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हुए हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले पर संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव से दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।