
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सामग्री खरीद में भ्रष्टाचार के मामले के बीच अब रिश्वतखोरी के मामले भी चर्चा में हैं। पिछले छह माह में (अप्रैल से सितंबर के बीच) लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई में निकायों में पांच अधिकारी व कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े जा चुके हैं। रायसेन जिले की नगर परिषद उदयपुरा के उपयंत्री और नगर पालिका मंडला के सीएमओ दो-दो लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए थे।
वहीं, नगर पालिका नरसिंहपुर के लिपिक को 25 हजार और जबलपुर की पनागर नगर परिषद के उपयंत्री व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था। इस तरह अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच चार मामलों में पांच अधिकारी-कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में आए थे।
इन मामलों में निर्माण कार्य की सुरक्षा निधि और अनुभव प्रमाण-पत्र जारी करने, ठेकेदार के भुगतान के बाद एफडीआर व बैंक गारंटी लौटाने, निर्माण कार्य से जुड़े मामलों और नल-जल योजना के काम के एवज में रिश्वत मांगने के आरोप हैं। वर्ष 2013 से अभी तक नगरीय निकायों के 59 अधिकारी-कर्मचारी लोकायुक्त व ईओडब्ल्यू की जांच में घिरे हैं।
विभाग से अभियोजन स्वीकृति मिलने पर इन मामलों में कोर्ट में चालान प्रस्तुत किया जाएगा। इनमें अधिकतर रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए हैं, तो कुछ के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति का मामला है। इसमें नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत तीनों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं।
उधर, विभिन्न निकायों में महंगी दरों पर सामग्री खरीद के ताजा मामले में विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त (एसपीई) ने स्वतः संज्ञान लेकर जांच प्रारंभ की है। एसपीई के महानिदेशक योगेश देशमुख ने बताया कि नगरीय विकास एवं आवास विभाग से पूरी जानकारी मांगी जा रही है। दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद प्रकरण कायम किया जाएगा। इस संबंध में विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने कहा कि लोकायुक्त संगठन द्वारा जो भी जानकारी मांगी जाएगी, वह उपलब्ध कराएंगे।
यह भी पढ़ें- रेलवे स्टेशन बना शराब बिक्री का अड्डा, पटरी पर खड़े होकर बेच रहा था कच्ची शराब, राजगढ़ पुलिस ने रंगे हाथ पकड़ा