रिश्वत केस में पूर्व TI अर्जुन जायसवाल और होमगार्ड दोषमुक्त: लोकायुक्त ने बनाया था प्रकरण, कोर्ट ने कहा- 'संदेह प्रमाण की जगह नहीं ले सकता'
अदालत ने कहा कि केवल रिश्वत की राशि बरामद होना पर्याप्त नहीं है। एफएसएल रिपोर्ट में अर्जुन जायसवाल की आवाज की निश्चित पहचान नहीं हो सकी और रिश्वत मांग...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 05 Oct 2026 09:39:47 PM (IST)Updated Date: Mon, 05 Oct 2026 09:39:47 PM (IST)
प्रतीकात्मकHighLights
- रिश्वत मामले में थाना प्रभारी और होमगार्ड दोषमुक्त
- कोर्ट- 'केवल रिश्वत की राशि बरामद होना पर्याप्त नहीं है'
- लोकायुक्त ने 25 हजार रुपये बरामद किए जाने का दावा किया था
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल/सीहोर। लोकायुक्त पुलिस द्वारा श्यामपुर थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी उपनिरीक्षक अर्जुन जायसवाल और होमगार्ड सैनिक अजय मेवाड़ा के खिलाफ दर्ज रिश्वत मांगने के मामले में विशेष न्यायालय ने दोनों को दोषमुक्त कर दिया है।
विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) स्मृता सिंह ठाकुर ने फैसले में कहा कि अभियोजन दोनों आरोपितों के खिलाफ आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता संदीप गुप्ता ने पैरवी की।
यह थी पूरे मामले की कहानी
अभियोजन के अनुसार शिकायतकर्ता भागीरथ जाटव ने श्यामपुर थाने में अपने वाहन कैंपस लोडिंग वाहन की चोरी की शिकायत की थी। आरोप था कि तत्कालीन थाना प्रभारी अर्जुन जायसवाल ने चोरी की रिपोर्ट दर्ज करने के बदले 50 हजार रुपये की मांग की और बाद में 25 हजार रुपये लेने पर सहमति जताई।
इसी मामले में होमगार्ड जवान अजय मेवाड़ा पर भी सहयोग करने और रिश्वत की राशि स्वीकार करने का आरोप लगाया गया था। लोकायुक्त ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई की और 25 हजार रुपये बरामद किए जाने का दावा किया था।
संदेह के घेरे में रहे बयान
हालांकि सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने मामले की मूल कहानी और रिश्वत मांगने के प्रमाणों पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता जिस वाहन को चोरी का बता रहा था, जांच में उसके चोरी होने की पुष्टि नहीं हुई।
वाहन घटना से पहले ही तेलंगाना के आरटीओ कार्यालय में जब्त मिला था। श्यामपुर थाने के तत्कालीन उपनिरीक्षक राकेश कुमार शर्मा की जांच में भी वाहन चोरी की रिपोर्ट को गलत पाए जाने पर खारिज करने की कार्रवाई की गई थी।
रिश्वत मांगने का आरोप भी प्रमाणित नहीं हुआ
अदालत ने ट्रैप की कार्रवाई और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए पाया कि रिश्वत मांगने से संबंधित बातचीत की रिकार्डिंग में भी कई महत्वपूर्ण कमियां थीं। एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार अर्जुन जायसवाल की आवाज से कथित बातचीत का मिलान निश्चित रूप से साबित नहीं हो सका।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि शिकायतकर्ता ने बार-बार हाफिज नामक व्यक्ति से रिश्वत मांगने की बातचीत होने की बात कही, लेकिन अभियोजन ने न तो हाफिज को आरोपित बनाया और न ही उसे गवाह के रूप में पेश किया।
अदालत ने माना कि केवल रिश्वत की राशि बरामद होना पर्याप्त नहीं है, जब तक अवैध पारितोषिक की मांग भी प्रमाणित न हो। अभियोजन आरोपितों के बीच रिश्वत की मांग और राशि प्राप्त करने की साजिश भी साबित नहीं कर सका।
थाना प्रभारी और होमगार्ड जवान को मिली राहत
अदालत ने सभी परिस्थितियों और साक्ष्यों का मूल्यांकन करते हुए कहा कि मामले में दो संभावनाएं सामने आती हैं तो आरोपितों को उस संभावना का लाभ दिया जाना चाहिए जो उनके पक्ष में हो।
इसके बाद अदालत ने अर्जुन जायसवाल को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा सात तथा धारा सात सहपठित भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी के आरोपों से तथा अजय मेवाड़ा को धारा 12 के विकल्प में धारा सात सहपठित धारा 120-बी के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। दोनों के जमानत बंधपत्र भी मुक्त किए गए।