त्विषा शर्मा केस: अदालत ने खारिज की समर्थ सिंह की जमानत याचिका; कहा- डिफॉल्ट बेल का अधिकार नहीं
त्विषा शर्मा मौत मामले में अदालत ने समर्थ सिंह की 24 सितंबर को दायर डिफाल्ट बेल याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि 90 दिन की अवधि पूरी होने से पहले ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 05 Oct 2026 09:09:48 PM (IST)Updated Date: Mon, 05 Oct 2026 09:09:48 PM (IST)
त्विषा शर्मा की मौत के मामले में आरोपी समर्थ सिंह को अदालत से डिफॉल्ट बेल नहीं मिली। फाइल फोटो।HighLights
- कोर्ट ने समर्थ सिंह की डिफाल्ट बेल खारिज की
- 90 दिन के भीतर दाखिल हुआ आरोप पत्र
- आरोपित को डिफाल्ट बेल का अधिकार नहीं है
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा की मौत के मामले में आरोपित समर्थ सिंह को अदालत से डिफॉल्ट बेल नहीं मिली। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शोभना भलावे की अदालत ने समर्थ सिंह की ओर से 24 सितंबर को दायर याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया।
अदालत ने माना कि सीबीआई ने समर्थ सिंह की गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे होने से पहले ही आरोप-पत्र पेश कर दिया था और अदालत ने उस पर संज्ञान ले लिया है। ऐसे में आरोपित डिफाल्ट बेल का कानूनी अधिकार नहीं रखता।
पीड़ित पक्ष का दलील पर पैसला
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अंकुर पाण्डेय ने बताया कि अदालत के आदेश के अनुसार समर्थ सिंह को 23 मई को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद वह न्यायिक अभिरक्षा में है। सीबीआई ने 17 अगस्त को आरोपित समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 85, 108 और 3(5) के तहत आरोप पत्र प्रस्तुत किया था।
अदालत ने इस पर संज्ञान लिया और बाद में मामले को विचारण के लिए अपर सत्र न्यायालय को सौंप दिया। समर्थ सिंह की ओर से दलील दी गई थी कि सीबीआई ने 90 दिन के भीतर पूरी जांच नहीं की और केवल अधूरा आरोप पत्र पेश किया है।
इसलिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 187(3) के तहत उसे डिफाल्ट बेल का अधिकार है।
फोन डेटा और डीवीआर की जांच बाकी
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि दहेज की मांग, मृतका के फोन से मिले डेटा और घर के डीवीआर की फोरेंसिक जांच अभी बाकी है।
सीबीआई और फरियादी की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि निर्धारित अवधि के भीतर मूल आरोप पत्र दाखिल हो चुका है। आगे की जांच जारी रहना आरोप पत्र को अमान्य नहीं करता।
अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न न्याय दृष्टांतों का उल्लेख करते हुए माना कि इस मामले में सीबीआई ने 90 दिन की अवधि समाप्त होने से पहले आरोप पत्र दाखिल किया था और उस पर न्यायालय संज्ञान भी ले चुका है।
अदालत के तरफ से कहा गया कि आरोप पत्र दाखिल होने और उस पर संज्ञान लिए जाने के बाद आरोपित समर्थ सिंह को डिफॉल्ट बेल का लाभ नहीं दिया जा सकता।
परिणामस्वरूप 24 सितंबर को प्रस्तुत आवेदन निरस्त कर दिया गया। अदालत ने केस डायरी सीबीआई को लौटाने और पत्रावली को दशम अपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में भेजने के निर्देश दिए हैं।