
बृजेंद्र ऋषीश्वर, नईदुनिया, भोपाल। राजधानी की पुलिस कमिश्नरी में इन दिनों बदमाशों के हौसले बुलंद हैं। पुलिस की गश्त, वाहन चेकिंग और निगरानी के दावों के बावजूद संपत्ति संबंधी अपराधों के आंकड़े पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। 1 जनवरी से 30 सितंबर 2026 तक के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि शहर में सेंधमारी, चोरी और चेन स्नैचिंग तीनों ही मामलों में बढ़ोतरी हुई है।
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, सेंधमारी के मामले पिछले साल के 355 से बढ़कर 426 हो गए हैं, यानी इसमें करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, चोरी की घटनाएं 355 से बढ़कर 403 पर पहुंच गईं, जो पिछले वर्ष से 13.5 प्रतिशत अधिक हैं। तेज उछाल चेन स्नैचिंग में देखने को मिला, जहां मामले 6 से बढ़कर 11 हो गए, यानी इसमें 83.3 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया।
इस अवधि में लूट के कुल 41 मामले दर्ज हुए, जिनमें 11 चेन स्नैचिंग और एक डकैती शामिल है। राहत की एकमात्र बात यह रही कि वाहन चोरी के मामले 1,454 से घटकर 1,382 पर आ गए, हालांकि इसके बावजूद रोजाना औसतन करीब पांच वाहन अब भी चोरी हो रहे हैं।
शहर के बाहरी इलाके अब अपराध के हॉटस्पॉट बनकर उभर रहे हैं। पुलिस ने कोलार, चूनाभट्टी, गांधी नगर, निशातपुरा, कटारा हिल्स, बागसेवनिया, शाहपुरा, अयोध्या नगर, मिसरोद, गोविंदपुरा, पिपलानी, कोहेफिजा और शाहजहांनाबाद थाना क्षेत्रों को सेंधमारी और चोरी के लिहाज से संवेदनशील माना है। राह चलते लोगों के हाथ से मोबाइल छीने जाने की घटनाएं करीब-करीब एक दिन छोड़कर हो रही हैं, लेकिन इनके खुलासे न होने से वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि भोपाल के थानों में लगभग 90 प्रतिशत थाना प्रभारी वे ही हैं जो सालों से यहीं जमे हुए हैं, हालांकि चुनाव के समय हटाए गए, लेकिन फिर वापस आ गए, तो फिर उनकी मुखबिरी नेटवर्किंग इतनी कमजोर क्यों है और आपराधिक वारदातों के खुलासे में देरी क्यों हो रही है? लोगों में नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि यदि पुलिस के एसीपी के घर चोरी होती है, तो पुलिस तुरंत हरकत में आकर राजस्थान से चोरों को पकड़ लाती है, जबकि आम लोगों के यहां हुई चोरी और लूट की घटनाओं में जांच ही चलती रहती है।
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रिटायर्ड डीएसपी यूएस तिवारी के अनुसार, शहर में चड्डी-बनियान गिरोह सहित अन्य आपराधिक गिरोह बाहरी इलाकों में ज्यादा सक्रिय रहते हैं। बदमाश खेतों के रास्तों से कॉलोनियों में घुसकर रात के समय मकानों को निशाना बनाते हैं।
अपराधों को लेकर हर महीने समीक्षा बैठक की जाती है, ताकि कमजोर इलाकों में पुलिस बल बढ़ाया जा सके। जिन स्थानों पर घटनाएं हुई हैं, वहां पुलिस जांच में जुटी है। गश्त बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं, हर थाने में माइक्रो बीट बनाई गई हैं, और आदतन अपराधियों पर कड़ी निगरानी रखते हुए चोरी का माल बरामद करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। - संजय कुमार, पुलिस कमिश्नर भोपाल