
आनंद दुबे, भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मासूम बच्चियों से दुष्कर्म के बाद बेरहमी से उनकी हत्या करने के मामलों में पांच दरिंदों को जिला अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। आरोपितों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए अहम सबूत क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला ने जुटाए थे। इस लैब में अब डीएनए की जांच भी शुरू हो गई है। भदभदा रोड स्थित क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना वर्ष-2005 में हुई थी। प्रयोगशाला के संचालक डॉ.दिनेश शर्मा ने बताया कि पहले विसरा को जांच के लिए सागर स्थित प्रयोगशाला भेजना पड़ता था। दो वर्ष पहले विसरा की जांच भी भोपाल में ही शुरू कर दी गई। फरवरी 2020 से यहां डीएनए सैंपल की जांच भी शुरू कर दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा दुष्कर्म, विशेषकर पोक्सो के मामले में डीएनए जांच अनिवार्य करने के आदेश के बाद इस लैब की उपयोगिता काफी बढ़ गई है। अंधे कत्ल के मामलों में भी डीएनए सैंपल की जांच से मिले साक्ष्य अहम होते हैं। वैज्ञानिक साक्ष्य होने के कारण अदालत में भी लैब की रिपोर्ट को स्वीकार किया जाता है। इस लैब में भोपाल, होशंगाबाद के अलावा मालवा क्षेत्र के जिलों के भी सैंपल जांच के लिए आ रहे हैं। सात दिन के अंदर सैंपल की रिपोर्ट तैयार हो जाती है।
मृत शरीर के नाखून से मिले साक्ष्य भी काफी होते हैं : डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि अक्सर दुष्कर्म के केस में पीड़िता की हत्या भी कर दी जाती है। इस तरह के केस में फोरेंसिक जांच के दौरान स्लाइड, कपड़ों से साक्ष्य जुटाने के साथ ही मृतक के नाखून से भी सैंपल लिए जाते हैं। घटना के दौरान संघर्ष के कारण आरोपित के साक्ष्य नाखून की खरोंच में रह जाते हैं। डीएनए जांच से आरोपित की मौजूदगी स्पष्ट हो जाती है।
तीन दिन पुराने खून की बूंद से मिला था सबूत : लैब के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.एमपी भास्कर ने बताया कि यहां शुरू से बॉयोलॉजी/सिरोलॉजी से सैंपल जांच कर कई जटिल अपराधों का पर्दाफाश करने के लिए अहम साक्ष्य दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त शहर में मासूम बच्चियों के दुष्कर्मी हत्यारे विष्णु भामोरे, दिलीप बुनकर, नंदकिशोर, मुस्तफा और दुष्कर्म, हत्या की शिकार 3 साल की बच्ची के पिता के भी इस लैब से जुटाए गए सबूतों के आधार पर जिला अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि ऊपरी की अदालतों में मामले अभी लंबित हैं। इस वजह से इनमें से किसी भी आरोपित को फांसी नहीं हो सकी है।
पूरा शहर दरिंदों के खिलाफ खड़ा था
केस -1 : आठ साल की बच्ची 3 फरवरी-2013 की शाम भोपाल उत्सव मेला के पास से अचानक लापता हो गई थी। अगले दिन झाड़ियों से कुत्ता उसका एक पैर खींचकर ले जाता दिखा, तब क्षतविक्षत शव तब बरामद हुआ था। इस मामले में एएसएस टीम ने शव और आसपास से साक्ष्य जुटाये थे। इस मामले में 16 संदेहियों से पूछताछ हुई। इनमें से एक नंदकिशोर से तीन दिन पुराने खून का मामूली सा धब्बा अहम सुराग साबित हुआ।
केस-2 : कमला नगर इलाके में रहने वाली नौ साल की बच्ची 8 जून-2019 को लापता हो गई थी। अगले दिन उसके घर से 15 फीट की दूरी पर उसका शव बरामद हुआ था। लड़की के पड़ोस में रहने वाला विष्णु भामोरे गायब हो गया था। उसके कमरे की तलाशी में मिले साक्ष्य लैब में वैज्ञानिक जांच के बाद अहम साबित हुए। इस मामले में अदालत ने 32 दिन में विष्णु को फांसी की सजा सुनाई थी।