नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। प्रदेश की राजधानी भोपाल में शासन का पूरा तंत्र मौजूद है। मंत्रालय से लेकर अधिकांश बड़े विभाग, आयोग और प्रमुख संस्थानों के कार्यालय यहीं हैं। इसके बावजूद हाईकोर्ट से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए भोपाल और आसपास के जिलों के पक्षकारों, वकीलों और कई मामलों में सरकारी अधिकारियों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है।
मामला एक तारीख का हो या लंबे समय तक चलने वाली सुनवाई का, हर बार यात्रा का खर्च, समय और कामकाज का नुकसान जुड़ता जाता है।
भोपाल में हाईकोर्ट बेंच की मांग अब केवल अधिवक्ताओं की सुविधा का मुद्दा नहीं, बल्कि आम आदमी के लिए सस्ता, शीघ्र और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने से जुड़ा सवाल बन गई है।
भोपाल पहले से ही प्रशासनिक और संस्थागत केंद्र है। ऐसे में हाईकोर्ट बेंच की मांग के पीछे सबसे बड़ा तर्क यही है कि न्याय पाने का अधिकार तभी प्रभावी होगा, जब न्याय तक पहुंच व्यावहारिक और सुलभ भी हो।
एक मुकदमा, कई तारीखें और हर बार लंबा सफर
हाईकोर्ट से जुड़े मामलों में अक्सर एक-दो सुनवाई में फैसला नहीं होता। लंबे समय तक चलने वाले मामलों में पक्षकारों और अधिवक्ताओं को बार-बार संबंधित पीठ के सामने उपस्थित होना पड़ता है। ऐसे में भोपाल से जबलपुर या अन्य शहरों तक की यात्रा केवल दूरी का सवाल नहीं रहती।
हर तारीख के साथ आने-जाने का खर्च, ठहरने और भोजन का खर्च तथा कामकाज छूटने से होने वाला नुकसान भी बढ़ता है। गरीब, बुजुर्ग, महिलाएं, दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर पक्षकारों के लिए यह परेशानी और गंभीर हो जाती है। कई लोगों के लिए हाईकोर्ट तक पहुंचना ही मुकदमे की लागत का बड़ा हिस्सा बन जाता है।
भोपाल में बेंच होती तो करीब 10 जिलों को राहत
भोपाल में हाईकोर्ट बेंच स्थापित होने का लाभ केवल राजधानी के लोगों तक सीमित नहीं रहेगा। भोपाल के साथ सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़, नर्मदापुरम सहित आसपास के करीब 10 जिलों के लोगों को हाईकोर्ट की सुविधा नजदीक मिल सकेगी।
रिट याचिका, सिविल-क्रिमिनल अपील, रिवीजन, सर्विस मैटर, टैक्स सहित अन्य मामलों में लोगों की पहुंच आसान होगी। इससे यात्रा और ठहरने पर होने वाला अतिरिक्त खर्च कम होगा और पक्षकारों को अपनी नौकरी, व्यवसाय या रोजमर्रा के काम से लंबे समय तक दूर नहीं रहना पड़ेगा।
व्यापारियों और किसानों को भी सीधा फायदा
चैंबर ऑफ कामर्स भोपाल के अध्यक्ष गोविंद गोयल ने कहा कि व्यापारियों के लिए हर सुनवाई का मतलब कारोबार से समय निकालना है। लंबी दूरी की यात्रा और कई तारीखों के कारण कारोबार प्रभावित होता है।
छोटे कारोबारियों के लिए दूसरे शहर जाकर मुकदमे की पैरवी कराना आर्थिक रूप से ज्यादा मुश्किल हो सकता है। इसका असर व्यापार पर पड़ता है।
सरकार का भी बचेगा करोड़ों का खर्च
अधिवक्ता प्रियनाथ पाठक के मुताबिक बेंच स्थापित होने से आम लोगों के साथ शासन को भी फायदा होगा। अधिकारियों और कर्मचारियों के जबलपुर आने-जाने और ठहरने पर हर साल होने वाला करोड़ों रुपये का खर्च बचाया जा सकता है।
यह मांग केवल अधिवक्ताओं की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि आम आदमी, व्यापारी और किसान को सुलभ न्याय दिलाने की मांग है।
भोपाल में हाईकोर्ट की बेंच की स्थापना राजधानी ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के विकास के लिए भी जरूरी है। इसका सबसे बड़ा लाभ गरीब और जरूरतमंद वर्ग को मिलेगा। वर्तमान में लोगों को न्याय के लिए जबलपुर या इंदौर जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे का अतिरिक्त बोझ बढ़ता है। जल्द ही कमेटी बनाकर रूपरेखा और रोडमैप तैयार किया जाएगा।- अधिवक्ता देवेंद्र सिंह रावत, अध्यक्ष, जिला अभिभाषक संघ भोपाल।