
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा निरस्त करते हुए महत्वपूर्ण फैसला दिया है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि केवल मोबाइल फोन की काल डिटेल रिकार्ड (सीडीआर) के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराकर सजा नहीं दी जा सकती।
अभियोजन यह साबित करने के लिए मोबाइल टावर लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज अथवा अन्य ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका कि मृतक और आरोपी घटना के समय साथ थे। बैतूल निवासी प्रकाश उर्फ मुन्ना ने जिला न्यायालय इटारसी द्वारा हत्या सहित अन्य धाराओं में आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी।
अभियोजन के अनुसार नौ अप्रैल, 2021 को मुलताई निवासी 45 वर्षीय जगन गीद बैतूल आया था। आरोप था कि वह अपीलकर्ता और उसके साथी से मिला तथा तीनों एक ढाबे में भोजन करने गए। बाद में मृतक की हत्या कर शव केसला थाना क्षेत्र के एक खेत में फेंक दिया गया। शव 18 अप्रैल को बरामद हुआ था।
हाई कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने उस ढाबे के सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत नहीं किए, जहां तीनों के साथ होने का दावा किया गया था। अभियोजन ने केवल दोनों के बीच हुई फोन बातचीत की सीडीआर पेश की।
कोर्ट ने कहा कि फोन पर बातचीत से केवल संपर्क सिद्ध होता है, इससे यह साबित नहीं होता कि दोनों साथ थे या घटना स्थल के आसपास मौजूद थे। युगलपीठ ने अभियोजन के साक्ष्यों को दोष सिद्ध करने के लिए अपर्याप्त मानते हुए अपील स्वीकार कर आरोपित को दोषमुक्त कर दिया।