यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 02, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Rajendra Shukla: प्रदेश के मेडिकल कालेजों में जल्द भरे जाएंगे शिक्षकों के रिक्त पद, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने दिए निर्देश
Medical Colleges of MP उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने प्रदेश में संचालित सभी 14 सरकारी मेडिकल कालेजों में शिक्षकों के रिक्त पद जल्द भरने के निर्देश...और पढ़ें
By Neeraj PandeyEdited By: Neeraj Pandey
Publish Date: Tue, 02 Jan 2024 09:36:42 PM (IST)Updated Date: Tue, 02 Jan 2024 09:36:42 PM (IST)
मेडिकल कालेजों में शिक्षकों के खाली पद जल्द भरने के दिए निर्देशHighLights
- उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ की बैठक
- मेडिकल कालेजों में शिक्षकों के खाली पद जल्द भरने के दिए निर्देश
- प्रदेश में संचालित हैं 14 सरकारी मेडिकल कालेज
राज्य ब्यूरो,भोपाल। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने प्रदेश में संचालित सभी 14 सरकारी मेडिकल कालेजों में शिक्षकों के रिक्त पद जल्द भरने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने केंद्र द्वारा पोषित छह, राज्य सरकार द्वारा बनाए जा रहे चार और प्रस्तावित 12 मेडिकल कालेजों के निर्माण से लेकर भर्ती तक में गति बढ़ाने के लिए कहा है। शुक्ल ने मंगलवार को मंत्रालय में चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक कर कर ये निर्देश दिए।
रिक्त पदों पर जल्द भर्ती के दिए निर्देश
उप मुख्यमंत्री ने संचालित कालेजों में स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रम में सीटों की वृद्धि के लिए अधोसंरचना विकास के कार्यों की कालेजवार समीक्षा की एवं संसाधनों की शीघ्र पूर्ति के लिए कहा, जिससे सीटें जल्दी बढ़ सकें। उन्होंने सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और रीवा, स्कूल आफ एक्सीलेंस फार आई इंदौर व स्कूल आफ़ एक्सीलेंस इन पल्मोनरी डिसीज जबलपुर में रिक्त पदों की जल्द पूर्ति हेतु निर्देशित किया।
बैठक में अपर मुख्य सचिव मो. सुलेमान, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा गोपाल चंद्र डाड, सचिव चिकित्सा शिक्षा सुरभि गुप्ता, अपर सचिव डा. पंकज जैन सहित विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।
![naidunia_image]()
यह भी दिए निर्देश
- नर्सिंग कालेज के साथ हास्टल का निर्माण भी किया जाए।
- पुराने कालेज एवं जर्जर हो चुके भवनों की मरम्मत के लिए भी व्यवस्थाएं की जाएं।
- केंद्र से समन्वय कर लंबित विषयों का शीघ्र निराकरण करें।
- हिंदी में एमबीबीएस की पुस्तकें आने वाले वर्ष के लिए भी तैयार कर लें।