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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 28, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

25 लाख की मनी लॉन्ड्रिंग केस का डर दिखाकर 40 लाख ठगे, ईडी अधिकारी बनकर जाल में फंसाया

रेलवे के एक सेवानिवृत्त अधिकारी का है। साइबर ठगों ने उन्हें फोन कर 25 लाख रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्तता के सबूत मिलने की बात से इतना डरा दिया ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Sun, 28 Sep 2025 08:19:58 PM (IST)Updated Date: Sun, 28 Sep 2025 08:19:58 PM (IST)
25 लाख की मनी लॉन्ड्रिंग केस का डर दिखाकर 40 लाख ठगे, ईडी अधिकारी बनकर जाल में फंसाया
25 लाख की मनी लॉन्ड्रिंग केस का डर दिखाकर 40 लाख ठगे

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। आतंकवाद, मनी लॉन्ड्रिंग, नशे की तस्करी में संलिप्तता के नाम से डराकर रुपये ठगने वाले गिरोह राजधानी भोपाल में फिर से जाल बिछा चुके हैं। ताजा मामला रेलवे के एक सेवानिवृत्त अधिकारी का है। साइबर ठगों ने उन्हें फोन कर 25 लाख रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्तता के सबूत मिलने की बात से इतना डरा दिया कि बुजुर्ग ने जीवन भर में कमाए 40 लाख रुपये बैंक से निकालकर ठगों के हवाले कर दिए। ठग ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 14 दिन तक बंधक बनाए रखा।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के अनुसार, 65 वर्षीय डेनिस किंटर अयोध्यानगर में रहते हैं। रेलवे से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और वर्तमान में चर्च में सेवा करते हैं। 22 अगस्त को उनके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। उसने कहा कि आपके दस्तावेजों के जरिए 25 लाख रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की गई है और ईडी में केस दर्ज किया गया है। ठग ने फोन लाइन पर ईडी के अधिकारी के रूप में एक अन्य ठग से बात भी करवाई।


दो सप्ताह तक चला यह सिलसिला

दोनों ने मिलकर डेनिस किंटर को करीब तीन घंटे तक कमरे में बंद रखकर फोन पर ही पूछताछ की। उन्होंने आश्वस्त किया कि यदि आपके दस्तावेजों का गलत उपयोग हुआ है तो अपने खाते में जमा राशि की जांच करवा लीजिए। यदि उनमें कुछ गलत नहीं पाया गया तो रुपये वापस मिल जाएंगे। पुलिस और ईडी के डर से डेनिस ने जांच के नाम पर साइबर ठगों के दिए खाते में रुपये डालना शुरू कर दिया। दो सप्ताह तक यह सिलसिला चला।

भतीजे-भतीजी से सहायता मांगी तो हुआ खुलासा

जब उनके बैंक खातों में जमा पूरी राशि खत्म हो गई, तो उन्होंने साथ में रहने वाले अपने भतीजे-भतीजी से सहायता मांगी। स्वजन ने जब जोर देकर पूछताछ की तो उनके साथ चल रही ठगी का खुलासा हुआ। उसके बाद पूरा परिवार क्राइम ब्रांच की साइबर सेल पहुंचा और आधिकारिक तौर पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

बाहर रहते हुए भी बंधक थे डेनिस

मामले का एक और डरावना पहलू सामने आया है। साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डेनिस को घर के किसी कमरे में बंधक नहीं बनाया था। उन्हें कहीं आने-जाने की छूट थी, लेकिन उन्हें इतना डराया गया था कि उन्हें अपनी हर गतिविधि की सूचना मैसेज के जरिये ठगों तक पहुंचानी होती थी। दो सप्ताह तक वह बेहद मानसिक दबाव में रहे।

इस साल डिजिटल अरेस्ट के 80 मामले

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इस साल के नौ महीनों में अकेले भोपाल में डिजिटल अरेस्ट के लगभग 80 मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस ने आधे से भी कम मामलों में एफआइआर दर्ज की है। इनमें से कुछ मामलों में उन लोगों को पकड़ा गया है, जिनके खाते में ठगी हुई रकम ट्रांसफर हुई थी।

डिजिटल अरेस्ट के प्रति जागरूकता के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं और एडवाइजरी जारी करते हैं। पुलिस हर मामले में जांच कर रही है, जिन खातों में राशि रुकती है तो उन्हें होल्ड कर पीड़ित को पहुंचाते हैं। साथ ही इन प्रकरणों में आरोपितों की धरपकड़ की जा रही है। - शैलेंद्र सिंह चौहान, एडिशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच

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