उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह; राम मंदिर चंदे में 300 करोड़ की गड़बड़ी का दावा, BJP-RSS पर साधा निशाना
दिग्विजय सिंह ने कहा कि धर्म का इस्तेमाल पैसा कमाने या राजनीतिक हथियार के रूप में नहीं होना चाहिए और सनातन की भावना को वसुधैव कुटुंबकम से जोड़कर देखना...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 04 Oct 2026 07:07:09 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Oct 2026 07:07:09 PM (IST)
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह। फाइल फोटो।HighLights
- दिग्विजय सिंह उज्जैन के महाकाल मंदिर से ‘सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा’ शुरू करेंगे
- 20 अक्टूबर से शुरू होगी 1000 किमी पदयात्रा, ओरछा होते हुए अयोध्या में समाप्त होगी
- चढ़ावे में गड़बड़ी का आरोप, 200 से 300 करोड़ रुपये तक की कथित हेराफेरी का दावा
डिजिटल डेस्क, भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या तक करीब 1000 किलोमीटर की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा’ शुरू करेंगे। यात्रा महाकाल मंदिर से शुरू होकर ओरछा में राम राजा के दर्शन के बाद अयोध्या पहुंचेगी और रामलला मंदिर में समाप्त होगी।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह यात्रा धर्म के नाम पर धन कमाने और आस्था को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ है। उन्होंने इसे ‘शिवधाम से रामधाम’ तक की यात्रा बताया। उनके अनुसार यात्रा में हर वर्ग, संप्रदाय और विचारधारा के लोग शामिल हो सकते हैं।
राम मंदिर के चंदे को लेकर लगाए आरोप
दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे, मंदिर निर्माण और रामलला को मिलने वाले चढ़ावे को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मंदिर के चंदे और चढ़ावे में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर के चंदे का पैसा भाजपा और आरएसएस के कार्यालय बनाने तथा चुनावी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया। उन्होंने मंदिर में चढ़ाए गए नकद, विदेशी मुद्रा और सोने-चांदी के आभूषणों की चोरी का भी दावा किया और कहा कि कुल गड़बड़ी 200 से 300 करोड़ रुपये तक हो सकती है।
दिग्विजय सिंह ने मंदिर निर्माण की लागत, ठेकों और अयोध्या में जमीन खरीद को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण की शुरुआती अनुमानित लागत करीब 800 करोड़ रुपये बताई गई थी, जबकि निर्माण में करीब 2200 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया गया।
आरएसएस और सावरकर पर भी साधा निशाना
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि आरएसएस और विनायक दामोदर सावरकर ने हिंदुत्व के नाम पर सनातन धर्म की मूल भावना को बदल दिया। उन्होंने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि गांधी सनातन परंपरा का सम्मान करते थे और हिंदू-मुस्लिम एकता तथा गरीब और वंचित लोगों के लिए काम करने को सनातन की भावना मानते थे।
उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ सनातन की मूल भावना है और धर्म का उद्देश्य व्यक्ति को भीतर से बदलना होना चाहिए।
80 साल की उम्र में करेंगे लंबी पदयात्रा
करीब 80 वर्ष की उम्र में 1000 किलोमीटर की पदयात्रा करने के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि उम्र उनके लिए बाधा नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि वे खुद को 50 वर्ष का महसूस करते हैं तो किसी को इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा राजनीतिक नहीं है। उनका कहना है कि धर्म का इस्तेमाल न पैसा कमाने के लिए होना चाहिए और न राजनीतिक हथियार के रूप में। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।