
अनुज मैना, नवदुनिया, भोपाल। महानगर का दर्जा पाने की ओर बढ़ रहे भोपाल में आग से निपटने वाली व्यवस्था खुद बदहाली से जूझ रही है। रविवार रात आइएसबीटी परिसर में खड़ी आठ बसों में लगी आग और इससे पहले न्यू मार्केट में दुकानों में आग लगने की घटना के दौरान दमकल वाहनों के देरी से पहुंचने की घटनाओं ने नगर निगम के अग्निशमन इंतजामों की पोल खोल दी है। शहर में तेजी से बढ़ती आबादी और ऊंची इमारतों के बीच फायर सिस्टम की तैयारियां अब भी नाकाफी हैं।
हालात यह हैं कि निगम के पास मौजूद दमकल वाहनों का बड़ा हिस्सा उम्र पूरी कर चुका है, फायर स्टेशनों की संख्या जरूरत से काफी कम है और प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी भी बनी हुई है। ऐसे में आग लगने पर शुरुआती समय में राहत और बचाव कार्य शुरू करना चुनौती बन जाता है। ऐसे में आग लगने की स्थिति में शुरुआती मिनटों में राहत पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर में करीब 28 लाख की आबादी और 418 वर्ग किमी क्षेत्र के लिए 11 फायर स्टेशन बताए जाते हैं, जिनमें से आठ ही सक्रिय हैं। तीन स्थानों पर सीमित संसाधनों के साथ दमकलें खड़ी हैं।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम के अग्निशमन अमले में शामिल 33 दमकल वाहन शामिल हैं, जबकि जरूरत 56 वाहनों की है। इनमें से 18 वाहन तो 20 से 54 साल पुराने हैं। जबकि नेशनल फायर एडवाइजरी के मानकों के अनुसार दमकलों की उपयोगी अवधि करीब 10 साल मानी जाती है।
इसके बावजूद पुरानी गाड़ियों पर निर्भरता बनी हुई है। ऐसे में सवाल है कि आग की बड़ी घटना होने पर निगम का अमला कितनी तेजी और क्षमता से मुकाबला कर पाएगा। साथ ही दमकल विभाग कर्मचारियों की कमी से भी जूझ रहा है। दमकल विभाग को 800 से 1000 फायर कर्मियों की जरूरत है, लेकिन दमकल विभाग के पास करीब 350 कर्मचारी की उपलब्ध हैं।
नगर निगम के बेड़े में शामिल यह दमकल वाहन पूरे समय फायर स्टेशनों पर मौजूद नहीं रहते हैं। राजधानी होने की वजह से शहर में प्रतिदिन मेले, धरना, प्रदर्शन सहित बड़े राजनैतिक आयोजन होते हैं, इनमें भी सुरक्षा की दृष्टि से दमकल वाहनों को लगाए जाते हैं।
हर दिन चार से पांच वाहन इस तरह आयोजनों में ही लगाए जाते हैं। रविवार को भी जब आइएसबीटी बस स्टैंड परिसर में खड़ी बसों में आग लगी उस समय आइएसबीटी स्थित फायर स्टेशन की गाड़ी एक मेले में लगी हुई थी। ऐसे में घटना की सूचना मिलने पर उसे बुलाया गया।
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शहर की आबादी और विस्तार के अनुपात में फायर स्टेशनों की कमी भी चिंता बढ़ाती है। आदर्श स्थिति में भोपाल में 16 फायर स्टेशन होने चाहिए, जबकि शहर में वर्तमान में 11 फायर स्टेशन की मौजूद हैं। इनमें फतेहगढ़, पुल बोगदा, बैरागढ़, छोला, माता मंदिर, गोविंदपुरा, कोलार, आइएसबीटी, गांधी नगर, यूनानी सफाखाना और न्यू कबाड़खाना शामिल हैं।
न्यू मार्केट और आदमपुर छावनी में अस्थायी व्यवस्था के तहत दमकलें तैनात की गई हैं। निगम के अनुसार, आशिमा माल, पटेल नगर, चांदबड़ और नीलबड़ में नए स्टेशन बनाने की जरूरत है, लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने से काम अटका है। मौजूदा स्टेशन कई बार 15 से 20 किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करते हैं, जिससे घटनास्थल तक पहुंचने में देरी का जोखिम रहता है।