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'पुजारी', 'मिस्टर इंडिया' और 'मौसी मां'... जानिए टाइगर स्टेट MP के जंगलों के उन बाघों की दास्तान, जिनके मिजाज और नाम हैं अनोखे

मध्य प्रदेश में 2022 की गणना के अनुसार 785 बाघ हैं। बढ़ती संख्या के कारण अब बाघ पारंपरिक जंगलों से बाहर नए क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगे हैं।

By Digital DeskEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Wed, 29 Jul 2026 01:31:20 PM (IST)Updated Date: Wed, 29 Jul 2026 01:31:20 PM (IST)
'पुजारी', 'मिस्टर इंडिया' और 'मौसी मां'... जानिए टाइगर स्टेट MP के जंगलों के उन बाघों की दास्तान, जिनके मिजाज और नाम हैं अनोखे
फाइल फोटो।

HighLights

  1. मध्य प्रदेश में 2022 की गणना के अनुसार 785 बाघ हैं
  2. टाइगर स्टेट मप्र ने बाघ संरक्षण में स्थापित किए कई कीर्तिमान
  3. मध्य प्रदेश वन विभाग अब वाघों की ब्रांडिंग भी कर रहा है

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश ने बाघ संरक्षण में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं, इसीलिए यहां बाघों की संख्या इतनी बढ़ी कि परंपरागत जंगल छोटे पड़ने लगे हैं। प्रदेश के ऐसे इलाकों में भी बाघ देख जा रहे हैं, जहां उनकी कभी कल्पना नहीं की गई थी।

प्रदेश में वर्ष 2022 की बाघ गणना के अनुसार 785 बाघ हैं। प्रदेश में बाघों के नामकरण किए गए हैं।

जब उन पर कैनाइन डिस्टेंपर वायरस का खतरा सामने आया तो युद्ध स्तर पर नियंत्रण के प्रयास किए गए। बड़ी संख्या में कुत्तों को टीके और बूस्टर डोज लगाए गए। भले ही रिकार्ड में बाघों का विज्ञानिक नाम टी-1 (टाइगर -1) टी-2 (टाइगर -2) दर्ज है, लेकिन पर्यटकों के लिए टाइगर रिजर्व में पुजारी, बजरंग, छोटा भीम जैसे नामों से बाघों की पहचान है।


कई बार पर्यटक इन नामों से विख्यात बाघों को देखने के लिए दो से तीन दिनों तक टाइगर रिजर्व का भ्रमण करते हैं।

जैसी आदत, वैसा नाम

बांधवगढ़ के बाघ को पुजारी नाम उसकी अनूठी और शांत आदतों के कारण मिला था, वह हर दिन पानी में स्नान कर, शांत भाव से ध्यान लगाता और सुबह एक पेड़ के पास पूर्व दिशा की ओर मुंह करके खड़ा हो जाता था। बाघ पुजारी की मौत मई 2026 में एक अन्य नर बाघ के साथ हुए संघर्ष में हुई थी।

कान्हा में ध्वजा झंडी क्षेत्र की बाघिन का नाम डीजे तो रातापानी टाइगर रिजर्व का रूद्राक्ष व त्रिशूल, खिवनी का युवराज और मीरा, पन्ना में बहुत ही कम दिखाई देने वाला बाघ मिस्टर इंडिया और संजय टाइगर रिजर्व की मौसी मां बाघिन अपनी बहन के तीन शावकों को भी पालती है। इसी तरह अन्य बाघों के नामकरण भी उनकी हाव भाव के कारण हुआ है।

यह भी पढ़ें- भोपाल: वायरल हो रहा कलियासोत में बाघ का पुराना वीडियो , उधर कलारा में तेंदुए के खौफ से गश्त और रेस्क्यू की मांग

बाघ शावकों को जंगल में रहने योग्य बना रहा बांधवगढ़

कान्हा टाइगर रिजर्व के डिप्टी फील्ड डायरेक्टर प्रकाश कुमार वर्मा बताते हैं कि मां से बिछड़े व अनाथ बाघ शावकों को दोबारा जंगल में बसाने के लिए रिवाइल्ड यानी जंगल में पुन: बसाने का माडल विकसित किया गया है। इस प्रयास से प्रदेश में अब तक 20 से ज्यादा बाघ शावकों को प्रशिक्षण देने के बाद प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा चुका है। इसके अलावा दो नए टाइगर रिजर्व रातापानी व माधव टाइगर रिजर्व बनाए गए हैं।

नौ टाइगर रिजर्व, 26 अभयारण्य, कोर से लेकर बफर तक बाघों की निगरानी बढ़ाई गई है। इधर, प्रदेश में आदिवासी समुदाय बाघ को केवल एक जंगली जानवर नहीं, बल्कि ‘बाघदेव’ के रूप में पूजते हैं।

टाइगर रिजर्व में बाघों ने अपने हाव-भाव के कारण पर्यटकों में अलग पहचान बनाई है। उनके अलग-अलग नाम हैं। इन बाघों की हम ब्रांडिंग भी कर रहे हैं। प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ी हैं उसके अनुपात में बाघों के संरक्षण के प्रति भी कई प्रयास किए गए हैं जो कारगर सिद्ध हुए हैं।- डॉ. समीता राजौरा, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक।