• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • शारदीय नवरात्रि
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

नईदुनिया पड़ताल: MP के अस्पतालों में बड़ा फर्जीवाड़ा, आउटसोर्स कर्मियों के वेतन से हर महीने गायब हो रहे ₹4.58 करोड़

सरकार कंपनी को प्रति कर्मचारी 13,571 रुपये देती है, जबकि कई कर्मचारियों को 5,500 से 11,700 रुपये तक मिलने की बात सामने आई। ईपीएफ और ईएसआई के नाम पर कट...और पढ़ें

By mukesh vishwakarmaEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Sun, 18 Oct 2026 11:08:12 AM (IST)Updated Date: Sun, 18 Oct 2026 11:08:12 AM (IST)
नईदुनिया पड़ताल: MP के अस्पतालों में बड़ा फर्जीवाड़ा, आउटसोर्स कर्मियों के वेतन से हर महीने गायब हो रहे ₹4.58 करोड़
प्रतीकात्मक, एआई से तैयार फोटो।

HighLights

  1. नईदुनिया ने 16 जिलों के कर्मचारियों की सैलरी स्लिप खंगाली
  2. हर महीने 4.58 करोड़ रुपये की कटौती का अनुमान
  3. सरकार से मिलते हैं 13,571 रुपये, वेतन मिलता है 5,500 से 11,700 रुपये तक

नईदुनिया, प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन के नाम पर बड़ा घोटाला हो रहा है। प्रदेश में करीब 10 हजार कर्मचारी 10 से 12 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन उनकी जेब में पूरा पैसा नहीं पहुंच रहा।

नईदुनिया की पड़ताल में सामने आया कि हर महीने औसतन 4.58 करोड़ रुपये और साल भर में करीब 55 करोड़ रुपये कंपनियां बीच में ही बचा रही हैं।

इसके पीछे प्रदेश में सक्रिय करीब 25 आउटसोर्स कंपनियां हैं। इनमें राज सिक्योरिटी फोर्स, कामथेन सिक्योरिटी इंदौर और स्काई बुल सिक्योरिटी सबसे बड़ी हैं।

इनके अलावा सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस, ओरियन, ईगल, क्रिस्टल जैसी 15-20 छोटी कंपनियां भी एनआरसी, एसएनसीयू और डीईआईसी में स्टाफ दे रही हैं।

सरकार हर कर्मचारी के लिए कंपनी को अर्द्ध-कुशल श्रमिक दर 13,571 रुपये देती है, लेकिन कर्मचारी को 5,500 से 11,700 रुपये ही मिल रहे हैं।

आउटसोर्स कंपनियों के नाम पर खेल

जानकारी के अनुसार, राज सिक्योरिटी फोर्स के पास अकेले भोपाल, सीहोर, भिंड, राजगढ़, मुरैना, रायसेन, विदिशा, नरसिंहपुर में सबसे ज्यादा टेंडर हैं। राजधानी के काटजू हॉस्पिटल में ही इसके 100 कर्मचारी हैं, जिन्हें नौ हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं।


कामथेन सिक्योरिटी इंदौर, उज्जैन, खरगोन, अलीराजपुर, धार और झाबुआ में सक्रिय है, अब इसका टेंडर खत्म होकर स्काई बुल को मिला है, लेकिन स्टाफ वही पुराना है और कटौती भी वही। कंपनियों का पैटर्न एक जैसा है। ईपीएफ और ईएसआई के नाम पर कटौती दिखाकर वेतन कम दिया जाता है।

बता दें कि कर्मचारी 8 साल से इसकी शिकायत कर रहे हैं। सीएम हेल्पलाइन तक में शिकायत हुई, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने न कार्रवाई की, न किसी कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया।

16 जिलों के कर्मचारियों की सैलरी स्लिप खंगाली

नईदुनिया ने 16 जिलों के कर्मचारियों की सैलरी स्लिप खंगाली तो पता चला की सभी जगह 13,571 की जगह कम भुगतान हो रहा है।

सीहोर के हर्ष को 11,338, भिंड के वीरेंद्र को 11,469, राजगढ़ की रानी मेवाड़ा, रजनी साहू, ललिता सेन को 10,148, मुरैना के रवि सोलंकी को 8,043, अलीराजपुर के राकेश डोडवा को 7,436, जेपी अस्पताल भोपाल के अजय वर्मा को 10,840, खरगोन की सुकन्या को 9,000, सागर की अम्बिका रैकवार को 8,000, मैहर की शबनम खान को 7,033, रायसेन की दुर्गा राजपूत को 10,358, नरसिंहपुर की रजनी राजपूत को 8,806, उज्जैन की संगीता राठौर को 7,650, अनूपपुर की स्वस्ति दुबे को 11,705, विदिशा की हेमा नायर को 7,500 और कटनी की राज कुमारी को मात्र 5,500 रुपये मिल रहे हैं।

प्रति कर्मचारी 4581 और कुल 73,310 रुपये की कटौती

इन 16 मामलों में कुल कटौती 73,310 रुपये है, औसत 4,581 रुपये प्रति कर्मचारी। इसी औसत से 10 हजार कर्मचारियों की सैलरी महीने में 4.58 करोड़ और साल में 54.98 करोड़ यानी करीब 55 करोड़ रुपये की बचत कंपनियां कर रही हैं।

अगर कटनी की तरह 8,071 रुपये कटौती मानी जाए तो यह घोटाला महीने में 8.07 करोड़ और साल में 96 करोड़ से ज्यादा बैठता है।

एम्स भोपाल में एमजे कंपनी ने 260 को निकाला तो 500 ने घेरा

बीते दिनों एम्स भोपाल में एमजे आउटसोर्स कंपनी ने 260 कर्मचारियों को एक साथ हटा दिया था। साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों का आरोप था कि कंपनी समय पर सैलरी, पीएफ और बोनस नहीं देती। इसके विरोध में करीब 500 कर्मचारियों ने एम्स गेट पर दिन-रात प्रदर्शन किया।

तीन दिन काम ठप रहने के बाद एम्स प्रबंधन जागा, बातचीत हुई और सभी कर्मचारियों को वापस रखा गया। इन प्रदर्शनकारियों में स्वीपर, बार्ड बाय जैसे कर्मचारी थे जो अस्पताल के लिए बहुत जरूरी होते हैं।

यह भी पढ़ें- MP में बांडेड डॉक्टरों के लिए VIP फरमान, सांसद-विधायक से लेकर कलेक्टर तक सुनेंगे समस्याएं, मिलेगी सुरक्षा और आवास

8 साल से चल रहा है कर्मचारियों का शोषण

मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने बताया कि यह शोषण 8 साल से चल रहा है। सरकार 13,571 रुपये देती है, कंपनी 5,500 से 9,000 थमा देती है।

पीएफ-ईएसआई के नाम पर फर्जीवाड़ा होता है। न सैलरी स्लिप देते हैं, न बोनस। जो आवाज उठाता है उसे हटा दिया जाता है। हमने कलेक्टर से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक शिकायत की है, लेकिन कुछ नहीं हुआ है।