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हमीदिया अस्पताल की इमरजेंसी में घायल के इलाज पर विवाद, 2 घंटे तक तड़पता रहा मरीज, दूसरे हॉस्पिटल ले जाना पड़ा

मरीज के स्वजन का आरोप है कि घायल के पैर से लगातार खून बहता रहा और दो घंटे तक उन्हें डॉक्टर और स्टाफ के बीच भेजा जाता रहा। उनका कहना है कि ड्रेसिंग तक ...और पढ़ें

By mukesh vishwakarmaEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Wed, 23 Sep 2026 12:03:04 PM (IST)Updated Date: Wed, 23 Sep 2026 12:03:04 PM (IST)
हमीदिया अस्पताल की इमरजेंसी में घायल के इलाज पर विवाद, 2 घंटे तक तड़पता रहा मरीज, दूसरे हॉस्पिटल ले जाना पड़ा
हमीदिया अस्पताल की इमरजेंसी में घायल के इलाज पर विवाद (फाइल फोटो)

HighLights

  1. हमीदिया अस्पताल में फिर लापरवाही का आरोप
  2. घायल को नहीं मिला समय पर इलाज
  3. डॉक्टर और स्टाफ पर टालमटोल का आरोप

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। हादसे में पैर की नस डैमेज और दो जगह फ्रैक्चर के बाद घायल को रात में हमीदिया अस्पताल की इमरजेंसी लाया गया। इलाज नहीं मिलने के आरोपों को लेकर विवाद हुआ। स्वजन का आरोप है कि घायल के पैर से लगातार खून बहता रहा और दो घंटे तक उन्हें डॉक्टर और स्टाफ के बीच भेजा जाता रहा। उनका कहना है कि ड्रेसिंग तक नहीं की गई। रात 2.45 बजे वे घायल को दूसरे अस्पताल ले गए।

मरीज के पैर में दो फ्रैक्चर और नस में आई चोट

रात एक बजे शहीद नगर चौराहे पर कुत्ते के सामने आ जाने से ऑटो पलट गया था। आटो चालक मोहम्मद अममान अहमद के छोटे भाई का पैर ऑटो में फंस गया। स्वजन के अनुसार पैर में दो फ्रैक्चर और नस में चोट आई है। घायल को रात करीब 1.15 बजे हमीदिया की इमरजेंसी में लाया गया। परिजन मोहम्मद अमान अहमद का आरोप है कि इलाज के लिए पूछने पर उन्हें डॉक्टर और स्टाफ के बीच भेजा जाता रहा।


उनका कहना है कि घायल को साइड में करने और एक बेड पर दो मरीज रखने के लिए कहा गया। विरोध के बाद वे घायल को पहले निजी अस्पताल और फिर एक और अस्पताल लेकर गए, जहां उपचार कराया गया। हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डा. सुनीत टंडन ने आरोपों से अलग स्थिति बताई। उनका कहना है कि मरीज के उपचार संबंधी दस्तावेज उपलब्ध हैं। इनमें ब्लड इन्वेस्टिगेशन, इंजेक्शन और उपचार का विवरण दर्ज है।

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उनके अनुसार रिकॉर्ड से मरीज को उपचार दिए जाने की पुष्टि होती है। अधीक्षक के अनुसार हमीदिया की इमरजेंसी में प्रतिदिन करीब 350 मरीज आते हैं, जबकि यहां करीब 40 बेड हैं। गंभीरता के आधार पर मरीजों को प्राथमिकता देना इमरजेंसी की सामान्य व्यवस्था का ही हिस्सा है।