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“कोई सिर मुंडाने को तैयार नहीं था, इसलिए मुझे खुद बनना पड़ा चाणक्य”

कोई कलाकार अपना सिर मुंड़ाने के लिए तैयार नहीं था। उस समय जो बिग बनती थी वह नकली दिख जाती थी। ऐसे में मैंने खुद चाणक्य की भूमिका निभाने का निर्णय लिया और उस भूमिका के बाद कोई किरदार नहीं किया।

By Sushil PandeyEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Mon, 11 May 2026 04:21:02 PM (IST)Updated Date: Mon, 11 May 2026 04:25:54 PM (IST)
“कोई सिर मुंडाने को तैयार नहीं था, इसलिए मुझे खुद बनना पड़ा चाणक्य”
डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी। (उनके निभाए गए किरदार चाणक्य की तस्वीर एआई से तैयार की गई है।)

HighLights

  1. फिल्मकार डा. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने नईदुनिया से विशेष बात की
  2. मोबाइल और इंस्टा रील को बताया टीवी के लिए बड़ी चुनौती
  3. शूटिंग और मेकिंग के लिए एआइ को बताया सिनेमा का भविष्य

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने अपने चर्चित धारावाहिक चाणक्य से जुड़े कई दिलचस्प अनुभव साझा किए। हिंदी पत्रकारिता के द्विशताब्दी वर्ष आयोजन में भोपाल पहुंचे फिल्मकार ने नईदुनिया से विशेष बातचीत में टीवी, सिनेमा, एआइ तकनीक और बदलते कंटेंट पर खुलकर बात की।

“गंजा सिर करने को तैयार नहीं थे कलाकार”

डॉ. द्विवेदी ने बताया कि चाणक्य धारावाहिक के लिए कलाकारों की कमी नहीं थी, लेकिन कोई अभिनेता अपने बाल मुंडवाने और लंबी शिखा रखने को तैयार नहीं था।

उन्होंने कहा,

“उस दौर में नकली विग असली नहीं लगती थी। ऐसे में मैंने खुद चाणक्य की भूमिका निभाने का फैसला किया।”

उन्होंने यह भी बताया कि चाणक्य का किरदार निभाने के बाद उन्होंने फिर अभिनय नहीं किया।

“मुझे अज्ञात संसार आकर्षित करता है”

ऐतिहासिक और पौराणिक विषयों पर काम करने को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे संसार आकर्षित करते हैं, जो लोगों की स्मृतियों का हिस्सा नहीं हैं।

रामायण, महाभारत और मौर्यकाल जैसे विषयों पर काम करने के लिए वे लगातार अध्ययन करते हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल का विद्यार्थी होने के कारण उनमें पढ़ने का धैर्य है।

“मोबाइल और इंस्टा रील ने टीवी को चुनौती दी”

टीवी धारावाहिकों की गिरती लोकप्रियता पर डॉ. द्विवेदी ने कहा कि आज कहानियों में ठहराव नहीं रहा।

उन्होंने कहा कि पहले धारावाहिक सप्ताह में एक बार आते थे, इसलिए दर्शकों में उत्सुकता बनी रहती थी। अब रोजाना प्रसारण और कमजोर कहानी के कारण दर्शक मोबाइल और इंस्टा रील की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं।

यह भी पढ़ें- Inspirational Story: जब चाणक्य ने व्यक्ति को परखने की तीन कसौटी बताई

“सिनेमा वही है, सिर्फ तकनीक बदली है”

सिनेमा में बदलाव पर उन्होंने कहा कि तकनीक जरूर बदली है, लेकिन सिनेमा का मूल स्वरूप आज भी वही है।

उन्होंने माना कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में ऐतिहासिक पात्रों को लेकर अभिनेताओं की रुचि कम होती है और अधिकतर कलाकार पहले रोमांटिक, थ्रिलर या एक्शन फिल्मों को प्राथमिकता देते हैं।

“एआइ बदल देगा फिल्मों की दुनिया”

डॉ. द्विवेदी ने कहा कि आने वाले समय में एआइ और वर्चुअल शूटिंग फिल्म इंडस्ट्री का भविष्य तय करेंगे।

उनके मुताबिक कुछ वर्षों बाद कलाकारों को आउटडोर शूटिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी और स्टूडियो में ही वर्चुअल तकनीक के जरिए बड़े दृश्य तैयार किए जा सकेंगे। इससे फिल्मों की लागत भी कम होगी।

नई फिल्म पर भी चल रहा काम

उन्होंने बताया कि उनकी नई ऐतिहासिक और पौराणिक फिल्म निर्माणाधीन है, जिसकी कहानी 16वीं शताब्दी पर आधारित होगी।


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