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भोपाल में गहरा सकता है जल संकट, NGT ने केरवा डैम का पानी बहाने पर जताई नाराजगी, कहा- 15 दिन में रोकने के उपाय करो

केरवा में पुल का निर्माण कार्य चलने की वजह से पानी बह रहा है, जिससे केरवा के एफटीएल तक पानी नहीं होने से वास्तविक सीमा का मौके पर मिलान नहीं हो सका। इ...और पढ़ें

By anuj mainaEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Wed, 16 Sep 2026 11:17:18 AM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026 11:18:48 AM (IST)
भोपाल में गहरा सकता है जल संकट, NGT ने केरवा डैम का पानी बहाने पर जताई नाराजगी, कहा- 15 दिन में रोकने के उपाय करो
केरवा डैम पर नए पुल का निर्माण चलने की वजह से बह रहा पानी। नवदुनिया

HighLights

  1. भोपाल के केरवा-कलियासोत में FTL की उड़ी धज्जियां
  2. केरवा में पानी बहने से वास्तविक सीमा का नहीं हो सका मिलान
  3. ड्रोन सर्वे में खुले अवैध रेस्टोरेंट और डेयरियों के राज

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। केरवा और कलियासोत डैम के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) की वास्तविक सीमा तय करने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देश पर मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) ने ड्रोन सर्वे ओर ग्राउंड ट्रुथिंग की थी। सर्वे में कलियासोत क्षेत्र में एफटीएल के बेहद करीब पक्के निर्माण, डेरी, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां सामने आई हैं। वहीं, केरवा में पुल का निर्माण कार्य चलने की वजह से पानी बह रहा है, जिससे केरवा के एफटीएल तक पानी नहीं होने से वास्तविक सीमा का मौके पर मिलान नहीं हो सका।

मामले पर मंगलवार को हुई सुनवाई

इसकी रिपोर्ट एमपीपीसीबी ने एनजीटी में पेश की, जिस पर मंगलवार को एनजीटी में सुनवाई हुई। एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच में हुई सुनवाई के दौरान पर्यावरणविद् डा. सुभाष सी. पांडे ने केरवा में सर्वे नहीं होने के साथ ही डैम का पानी बहाए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई।


उन्होंने कुछ फोटो और वीडियो भी पीठ के समक्ष पेश किए। उनका कहना था कि जब डैम में पानी एफटीएल तक नहीं पहुंचने की बात कही जा रही है, तो दूसरी ओर पानी बहाने से डैम कैसे भर पाएगा। जानबूझकर पानी बहाया जा रहा है, जिससे डैम नहीं भर पाएगा, जबकि केरवा डैम का पानी शहर के पेयजल के लिए आरक्षित है।

कई इलाकों में खड़ा हो सकता है पेयजल संकट

एफटीएल तक पानी न भरने से भविष्य में भोपाल के कई इलाकों में पेयजल संकट खड़ा हो सकता है। डा. सुभाष सी. पांडे और राशिद नूर खान ने बताया कि पीठ ने 15 दिन में पानी के बहाव को रोकने के उपाय करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि केरवा की वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए बिना आगे की कार्रवाई में जल्दबाजी नहीं की जाएगी। अब पीसीबी की रिपोर्ट और केरवा में पानी रोकने के बाद होने वाली स्थिति के आधार पर एफटीएल क्षेत्र में आगे की कार्रवाई तय होगी।

यह भी पढ़ें- ड्रोन सर्वे में सामने आई बड़े तालाब किनारे अतिक्रमण की चौंकाने वाली रिपोर्ट, आज NGT में होगी सुनवाई

कलियासोत एफटीएल के 50 मीटर दायरे में मिले थे अवैध निर्माण

ड्रोन सर्वे और ग्राउंड ट्रुथिंग के दौरान कलियासोत के एफटीएल क्षेत्र के 50 मीटर दायरे में कई अवैध निर्माण मिले थे। फिश फार्म क्षेत्र में एफटीएल से करीब 10 फीट की दूरी पर पक्का निर्माण और उससे लगी डेरी मिली। जलभराव क्षेत्र के भीतर सड़क निर्माण और प्लाटिंग के लिए मुनारें लगाए जाने की स्थिति भी दर्ज की गई। खुदागंज गांव में कई स्थानों पर पानी एफटीएल की सीमा से आगे तक पहुंचा मिला। जलभराव क्षेत्र से लगे हिस्सों में रेस्टोरेंट और अन्य निर्माण भी टीम ने दर्ज किए हैं।