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एमपी में ड्रग्स तस्करी बनी बड़ी चुनौती, दूसरे राज्यों से फ्लाइट, बसों और ट्रेनों से आ रहीं नशीली दवाइयां

रीवा, सतना और सीधी जिले में बड़ी मात्रा में कफ सीरप नशे के लिए उपयोग हो रहा है, जो उत्तर प्रदेश से अवैध तरीके से लाया जा रहा है। इससे प्रदेश में कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 02 Nov 2026 05:46:52 PM (IST)Updated Date: Mon, 02 Nov 2026 05:46:52 PM (IST)
एमपी में ड्रग्स तस्करी बनी बड़ी चुनौती, दूसरे राज्यों से फ्लाइट, बसों और ट्रेनों से आ रहीं नशीली दवाइयां
भोपाल आईएसबीटी पर डीआरआई ने पकड़ी भारी खेप।

HighLights

  1. 5 राज्यों के DGP की बैठक के बाद भी नहीं थमी तस्करी
  2. भोपाल आईएसबीटी पर डीआरआई ने पकड़ी भारी खेप
  3. अंतरराज्यीय सिंडिकेट पर नकेल कसने में पुलिस पिछड़ी

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश को नशा मुक्त बनाने के लक्ष्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती दूसरे राज्यों से लाई जा रही ड्रग की खेप है। अभियान चलाकर मादक पदार्थों की जब्ती और कार्रवाइयां भी हो रही हैं। इसके बावजूद दूसरे राज्यों से यात्री बस, रेल मार्ग और निजी वाहनों से ड्रग, गांजा व ड्रग बनाने की सामग्री लाई जा रही है। रीवा, सतना और सीधी जिले में बड़ी मात्रा में कफ सीरप नशे के लिए उपयोग हो रहा है, जो उत्तर प्रदेश से अवैध तरीके से लाया जा रहा है। इससे प्रदेश में कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।

बता दें कि सात अगस्त को इंदौर में पश्चिम क्षेत्र के पुलिस महानिदेशकों की बैठक में भी ड्रग तस्करी के नेटवर्क पर मिलकर प्रहार करने की जरूरत पर चर्चा हुई थी। इसमें मध्य प्रदेश के साथ राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा के डीजीपी शामिल हुए थे। इसके बाद भी तस्करी के अंतरराज्यीय मामले कम होने की जगह बढ़ रहे हैं।


बसों, ट्रेनों और फ्लाइट तक से तस्करी

इसी वर्ष मई में एसटीएफ ने दिल्ली और हरिद्वार से अवैध तरीके से लाए गए दो अलग-अलग ब्रांड के कफ सीरप की कुल 73 हजार बोतलें पकड़ी थीं। अगस्त में ग्वालियर फ्लाइट से दिल्ली से लाया गया ओजी गांजा पकड़ा गया था।

भोपाल के आईएसबीटी में 13 अक्टूबर से एक नवंबर के बीच राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने दिल्ली से यात्री बसों के जरिए लाई जा रही एम्फेटामाइन और मेथामफेटामाइन ड्रग के तीन मामले पकड़े। इसके पहले भोपाल रेलवे स्टेशन पर भी ड्रग पकड़ी गई थी। इसके पहले वर्ष 2024 में भोपाल में एमडी ड्रग बनाने का कारखाना गुजरात पुलिस ने पकड़ा था।

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खुफिया तंत्र को नहीं लग पा रही भनक

दरअसल, पुलिस के खुफिया तंत्र को तस्करी की जानकारी ही नहीं मिल रही है। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अरुण गुर्टू कहते हैं कि ड्रग्स तस्करी ही नहीं अन्य मामलों में भी पुलिस का खुफिया तंत्र कमजोर पड़ रहा है। इसमें सरकार को बजट और बल बढ़ाने की आवश्यकता है।

वहीं, एडीजी नारकोटिक्स डी श्रीनिवास वर्मा का कहना है कि राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाया है। सूचनाएं भी नियमित तौर पर साझा कर रहे हैं।

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