
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की महत्वाकांक्षी 'द्वारका नगरी योजना' के तहत विकास कार्य शुरू नहीं हो पा रहे हैं। योजना की गाइडलाइन न बनने से विकास कार्य अटके हुए हैं। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों के विकास कार्य और अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए द्वारका नगरी योजना की आधिकारिक घोषणा 18 फरवरी 2026 को प्रदेश सरकार के बजट (वित्तीय वर्ष 2026-27) के दौरान की गई थी।
उपमुख्यमंत्री व वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने विधानसभा में बजट भाषण देते हुए इस महत्वाकांक्षी योजना का एलान किया था। योजना एक अप्रैल 2026 से प्रभावी रूप से लागू मानी गई। सरकार ने इसे तीन वर्ष की अवधि (त्रिवर्षीय मेगा योजना) के भीतर पूरा करने के लक्ष्य के साथ मैदान पर उतारा।
योजना का उद्देश्य वार्ड स्तर पर सड़क, जलप्रदाय, सीवरेज, ऊर्जा बचत और ई-गवर्नेंस जैसी शहरी सेवाओं में सुधार करना है, लेकिन गाइडलाइन न बनने से अब तक काम शुरू नहीं हुए हैं। हालांकि नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधिकारियों का दावा है कि अगले माह अक्टूबर तक योजना की गाइडलाइन तैयार कर ली जाएगी।
राज्य सरकार द्वारा नगरीय निकायों में द्वारका नगरी योजना वित्त वर्ष 2026-27 में 2201.20 करोड़ रुपये अनुदान (शून्य प्रतिशत ब्याज पर राज्य शासन द्वारा ऋण) एवं 2798.80 करोड़ रुपये ऋण (वित्तीय संस्थाओं द्वारा) सहित कुल पांच हजार करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। अनुदान के रूप में ली गई ऋण राशि 2201.20 करोड़ रुपये का पुनर्भुगतान विभाग द्वारा 25 वर्ष बाद पांच समान वार्षिक किस्तों में किया जाएगा।
नगरीय निकायों द्वारा लिए जाने वाले ऋण एवं इस पर लगने वाले ब्याज का पुनर्भुगतान राज्य शासन एवं निकायों द्वारा 20 वर्षों में राज्य शासन के मुद्रांक शुल्क से प्राप्त होने वाली राशि से किया जाएगा। साथ ही शहर की मास्टर प्लान की सड़कों का निर्माण पीपीपी मोड पर किया जा सकेगा। इसमें मेट्रोपॉलिटन रीजन को ध्यान में रखते हुए कार्य कराए जा सकेंगे। केंद्र सरकार की प्रोत्साहन आधारित योजना अर्बन चैलेंज फंड की गैप फंडिंग द्वारका नगरी योजना से की जा सकेगी।
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