
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में ई-रिक्शा के अनियंत्रित संचालन से बिगड़ रही यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए अब राष्ट्रीय स्तर पर गाइडलाइन बनने का इंतजार है। अभी संचालन की स्पष्ट नीति नहीं होने के कारण कई शहरों में प्रमुख मार्गों और चौराहों पर जाम की स्थिति बनती है।
परिवहन विभाग की ओर से ई-रिक्शा के रंग के आधार पर अलग-अलग मार्ग निर्धारित करने की तैयारी की जा रही थी। इसी बीच लगभग डेढ़ माह पहले सुप्रीम कोर्ट ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को नीति बनाने के लिए कहा है।
इसी आधार पर मप्र में परिवहन विभाग कुछ बदलावों के साथ या ठीक उसी रूप में नीति को लागू करेगा। केंद्र की गाइडलाइन मिलने के बाद जिला स्तर पर कलेक्टर स्थानीय जरूरतों के अनुसार अतिरिक्त प्रविधान कर सकेंगे। इससे शहरों में सड़कों की चौड़ाई, यातायात दबाव और ई-रिक्शा की संख्या के हिसाब से संचालन व्यवस्था निर्धारित करने में मदद मिलेगी।
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बीते चार वर्षों से हर साल 20 से 25 हजार ई-रिक्शा पंजीकृत हो रहे हैं। प्रदेश में इनकी कुल संख्या एक लाख 10 हजार तक पहुंच गई है। इस संबंध में उप परिवहन आयुक्त किरण शर्मा का कहना है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की गाइडलाइन मिलने के बाद देखा जाएगा इसमें और क्या प्रविधान किए जा सकते हैं।