
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में दस वर्ष बाद जुलाई 2026 में पदोन्नतियां दी गईं। 2016 से पदोन्नतियां नहीं हुईं, इसलिए वरिष्ठता प्रभावित हुई है लेकिन सीधी भर्ती होती रही है। इससे पहले सेवा में आए अधिकारी-कर्मचारी पिछड़ गए।
इसे देखते हुए सरकार एक वर्ष में ही दोबारा पदोन्नति देने पर विचार कर रही है। इसमें 2016 में पदोन्नति की पात्रता रखने वाले कर्मचारियों को प्रोफार्मा पदोन्नति देकर एक वर्ष में दूसरी बार पदोन्नत किया जा सकता है।
इससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा और रिक्त पदों का युक्तियुक्तकरण भी संभव होगा। राज्य कर्मचारी समिति के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर सेवा अवधि में शिथिलता देने के साथ 10 वर्ष से अधिक सेवा पूरी कर चुके पात्र अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रोफार्मा पदोन्नति देने की मांग की है।
प्रदेश में वर्ष 2016 से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे अधिकारियों-कर्मचारियों को राहत देने के लिए कर्मचारी संगठनों ने सरकार से पदोन्नति नियमों में शिथिलता देने की मांग की है। राज्य कर्मचारी कल्याण समिति द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 में अर्हताकारी सेवा अवधि में शिथिलता प्रदान करने और 10 वर्ष से अधिक समय की सेवा पूरी कर चुके पात्र अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रोफार्मा पदोन्नति देकर दूसरी पदोन्नति का लाभ देने की मांग की है।
उन्होंने बताया कि पदोन्नति से जुड़े कई मामले उच्च न्यायालय और विधि विभाग में विचाराधीन रहे। इसके चलते प्रदेश के अनेक अधिकारी-कर्मचारियों को पदोन्नति नहीं मिल सकी।
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पदोन्नति नियमों के अनुसार पांच वर्ष में पदोन्नति का अवसर मिलता है, लेकिन न्यायालयीन प्रकरणों के कारण लंबा अंतराल हो गया। कई कर्मचारियों को एक पदोन्नति मिलने के बाद दूसरी पदोन्नति भी लंबित है।
वर्ष 2016 में पदोन्नति की पात्रता रखने वाले कर्मचारियों को प्रोफार्मा पदोन्नति देकर दूसरी पदोन्नति दी जा सकती है। इससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा और रिक्त पदों का युक्तियुक्तकरण भी संभव हो जाएगा।
उधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी विकल्पों पर विचार किया जाए और कर्मचारी हित में जो भी संभव हो, वह किया जाए। इससे यह उम्मीद की जा रही है कि नियमों व शर्तों में छूट दी जा सकती है।