By Brajendra rishishwarEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Mon, 05 Oct 2026 08:25:39 PM (IST)Updated Date: Mon, 05 Oct 2026 08:25:39 PM (IST)
नईदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़े के आरोप में सोमवार को करोंद में संचालित सृष्टि अस्पताल के संचालक राजकुमार सूर्यवंशी और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, कूट रचित दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया है।
शुरूआती जांच में पाया गया कि अस्पताल ने योजना में बने रहने के लिए झूठी स्टाफ सूची दी और फर्जी हस्ताक्षर वाली रिपोर्टों के सहारे मरीजों का इलाज दिखाकर शासन से भुगतान लिया ।
इस आधार पर एजेंसी ने 318(4)धोखाधड़ी, 336(3)मूल्यवान प्रतिभूति, 340(2) कूट रचित दस्तावेज़ और 61(2)आपराधिक षड्यंत्र भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा में एफआईआर दर्ज की।
गाइडलाइन का पालन नहीं
हम बता दें कि आयुष्मान योजना में गरीब परिवारों का इलाज सूचीबद्ध अस्पतालों में मुफ्त होता है और राशि शासन सीधे अस्पताल को देता है। इसके लिए अस्पताल के पास पर्याप्त और योग्य डाक्टर व स्टाफ होना जरूरी है।
अस्पताल को योजना के ऑनलाइन पोर्टल पर हर डॉक्टर और कर्मचारी का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर और यह जानकारी देना अनिवार्य होती है कि वह वास्तव में वहां नौकरी कर रहे है या नहीं।
2023 में योजना की सूची में जुड़ा अस्पताल
ईओडब्ल्यू के अधिकारी के अनुसार जांच में सामने आया कि अस्पताल ने पोर्टल पर स्टाफ की 45 एंट्री दर्ज की, लेकिन इनमें अलग-अलग नाम केवल करीब 15 हैं। बाकी नाम बार-बार दोहराया गया, कई डाक्टरों और नर्सिंग कर्मियों के नाम चार-चार बार दर्ज हैं।
सभी 45 एंट्री के आगे एक ही मोबाइल नंबर लिखा मिला, जो अस्पताल संचालक का है।यह अस्पताल 2023 में इस योजना की सूची में जोड़ा गया।
पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर भी फर्जी
सूची में जिस महिला पैथोलॉजिस्ट का नाम चार बार दर्ज है, वह एक मेडिकल कॉलेज में नौकरी करती हैं। उन्होंने जांच में बताया कि वह इस अस्पताल में कभी काम पर नहीं किया, न कोई दस्तावेज दिया और न नाम के उपयोग की सहमति दी।अस्पताल ने अपने डिपार्टमेंट ऑफ पैथोलॉजी के नाम से जांच रिपोर्ट जारी की, जिन पर एक एमडी पैथोलॉजिस्ट का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर और सील लगी थी।
चिकित्सक ने जांच में बताया कि रिपोर्टों पर किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। इस फर्जी हस्ताक्षर वाली कई रिपोर्टें उन मरीजों की हैं जिनका इलाज आयुष्मान योजना के तहत दिखाया गया।
सामने आईं गड़बड़ी
बता दें कि वर्ष 2025 में इस अस्पताल में 709 हितग्राहियों का इलाज कराया गया।जांच के दौरान एजेंसी ने जांच के दौरान बार-बार मांगने पर भी अस्पताल प्रबंधन सूची में दिखाए गए डॉक्टरों की नियुक्ति, वेतन या उपस्थिति का रिकॉर्ड, पैथोलॉजी की अनुमति और मरीजों की इलाज फाइलें पेश नहीं कर सका।
जांच अधिकारी का कहना है कि शासन से भुगतान की राशि और कौन कौन इस फर्जीवाड़े में शामिल हैं, उनकी जानकारी के लिए जांच की जा रही है।