डिजिटल डेस्क, भोपाल/ रायसेन। रायसेन जिले में समर्थन मूल्य पर मूंग उपार्जन में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की जांच में आरोप है कि किसानों की जमीन का फर्जी तरीके से पंजीयन कराकर खुले बाजार से सस्ती और घटिया किस्म की मूंग खरीदी गई और उसे सरकारी उपार्जन केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर बेच दिया गया।
मामले में ईओडब्ल्यू ने 8 सितंबर 2026 को अपराध क्रमांक 95/2026 दर्ज कर रंजीत ठाकुर, श्रीराम ठाकुर, गौरव ठाकुर समेत अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की है।
जांच में सामने आया है कि फर्जी पंजीयन के जरिए सरकारी राशि प्राप्त की गई, जिससे शासन को करीब 13.35 लाख रुपये की आर्थिक क्षति होने का अनुमान है। EOW मामले की विस्तृत विवेचना कर रहा है।
उपार्जन केंद्रों के ऑपरेटरों से जुटाते थे किसानों की जानकारी
ईओडब्ल्यू की जांच के मुताबिक आरोपियों ने ऐसे किसानों की जमीनों को निशाना बनाया, जिन्होंने उपार्जन समितियों में मूंग बेचने के लिए पंजीयन नहीं कराया था। उपार्जन केंद्रों पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटरों के पास ऐसे किसानों की जानकारी रहती थी।
आरोप है कि अधिकारियों और कर्मचारियों से मिलीभगत कर इन किसानों की जमीनों का पंजीयन आरोपियों ने अपने या अपने परिचितों के नाम पर करा लिया। इसके बाद इन्हीं पंजीयनों के आधार पर मूंग सरकारी केंद्रों पर बेचने की प्रक्रिया अपनाई गई।
किसानों की सहमति के बिना खुद को सिकमीदार बताया
जांच में सामने आया कि पंजीयन पर्ची के कॉलम-5 में जमीन मालिक या कौलीदार का नाम दर्ज करने के बजाय आरोपियों ने खुद को सिकमीदार यानी बटाईदार के रूप में दर्ज कराया।
ईओडब्ल्यू के अनुसार इसके लिए संबंधित किसानों से कोई कौलीनामा या सहमति नहीं ली गई। किसानों को उनकी जमीन पर हुए पंजीयन और उसके आधार पर सरकारी केंद्रों पर मूंग बेचे जाने की जानकारी भी नहीं थी।
जांच में एक किसान की करीब डेढ़ एकड़ जमीन दूसरे व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत किए जाने की बात सामने आई है। वहीं, एक अन्य किसान की पत्नी और बहू के नाम दर्ज करीब ढाई एकड़ जमीन के कई पंजीयन अलग-अलग लोगों के नाम पर किए गए।
एक अन्य किसान की पत्नी के नाम दर्ज करीब पौने दो एकड़ जमीन का भी कथित तौर पर फर्जी पंजीयन किया गया। इन पंजीयनों में दर्ज बैंक खाते भी संबंधित किसानों के नहीं पाए गए।
तीन हजार रुपये से कम में खरीदी मूंग
ईओडब्ल्यू के अनुसार आरोपियों ने स्थानीय व्यापारियों और बरेली मंडी से घटिया किस्म की मूंग 3 हजार रुपये प्रति क्विंटल से कम कीमत में खरीदी। इसके बाद यही मूंग सरकारी उपार्जन केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर बेच दी गई।
मूंग का समर्थन मूल्य वर्ष 2024-25 में 8,558 रुपये प्रति क्विंटल और वर्ष 2025-26 में 8,682 रुपये प्रति क्विंटल था। इस तरह बाजार से कम कीमत पर खरीदी गई मूंग को समर्थन मूल्य पर बेचकर आरोपियों ने बड़ा अनुचित लाभ कमाया।
श्रीराम ठाकुर को करीब 8.60 लाख का अनुचित लाभ
जांच के अनुसार श्रीराम ठाकुर ने अपने नाम पर किए गए दो पंजीयनों के माध्यम से 151.524 क्विंटल मूंग बेची। इसके एवज में शासन से उसे करीब 13.15 लाख रुपये मिले, जबकि मूंग की खरीद पर करीब 4.54 लाख रुपये खर्च किए गए थे। इस तरह करीब 8.60 लाख रुपये का अनुचित लाभ अर्जित किए जाने का आरोप है।
इसी तरह रंजीत ठाकुर ने 42.276 क्विंटल मूंग बेचकर करीब 3.67 लाख रुपये प्राप्त किए और लगभग 2.40 लाख रुपये का अनुचित लाभ कमाया। गौरव ठाकुर ने 41.136 क्विंटल मूंग बेचकर करीब 3.57 लाख रुपये प्राप्त किए और करीब 2.33 लाख रुपये का अनुचित लाभ अर्जित किया।
ईओडब्ल्यू के अनुसार तीनों आरोपियों से जुड़े मामलों में शासन को कुल करीब 13.35 लाख रुपये की आर्थिक क्षति हुई है।
मामला दर्ज, जांच जारी
ईओडब्ल्यू ने रंजीत ठाकुर, श्रीराम ठाकुर, गौरव ठाकुर और अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
मामले की विस्तृत विवेचना जारी है। ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर अन्य लोगों की भूमिका भी तय की जाएगी और संलिप्तता पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।