EOW का बड़ा फैसला: MP में 3,900 पेंडिंग मामलों को खत्म करने के लिए बना मास्टरप्लान, हर महीने सुलझाने होंगे 200 केस
प्रदेश में ईओडब्ल्यू के करीब 100 जांच अधिकारी तैनात हैं। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार हर महीने लगभग 200 मामलों के निराकरण की उम्मीद है, जिससे करीब 3900 ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 03:08:29 PM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 03:08:29 PM (IST)
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, भोपाल। नईदुनिया।HighLights
- हर जांच अधिकारी को हर माह निपटाने होंगे दो केस
- 3900 लंबित मामलों को खत्म करने का लक्ष्य
- डीजी उपेन्द्र जैन रख रहे सीधी निगरानी
नईदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) में अब फाइलों को लंबे समय तक लटकाए रखने का दौर खत्म होने जा रहा है। लगातार बढ़ रही शिकायतों और जांच प्रक्रियाओं में आती सुस्ती को पूरी तरह खत्म करने के लिए ईओडब्ल्यू मुख्यालय ने नवाचार लागू किया है।
इसके तहत अब विभाग के प्रत्येक जांच अधिकारी (आईओ) के लिए हर महीने कम से कम दो मामलों को उनके मुकाम तक पहुंचाना अनिवार्य कर दिया गया है।
ईओडब्ल्यू मुख्यालय के नए निर्देश के मुताबिक, हर जांच अधिकारी को हर महीने कुल दो मामलों का निपटारा करना होगा। इनमें एक मामला प्रारंभिक शिकायत का और दूसरा दर्ज आपराधिक प्रकरण का होगा।
अब तक ईओडब्ल्यू में दस्तावेजों की गहन जांच और नोटिस-दर-नोटिस की लंबी प्रक्रिया के कारण कई मामले लंबित रहते थे। इस सुस्ती को तोड़ने और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह समयबद्ध खाका तैयार किया गया है।
3900 लंबित मामलों का है बड़ा लक्ष्य
मौजूदा समय में पूरे प्रदेश में ईओडब्ल्यू के पास करीब 100 जांच अधिकारी तैनात हैं। यदि हर अधिकारी हर महीने तय लक्ष्य के मुताबिक दो केसों का निराकरण करता है, तो हर माह लगभग 200 मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा।
इसी सुनियोजित और तेज रफ्तार के बूते डीजी ने प्रदेशभर में अटके पड़े करीब 3,900 लंबित मामलों के अंबार को पूरी तरह खत्म करने का बड़ा लक्ष्य रखा है।
डीजी की सीधी निगरानी
इस पूरे विशेष अभियान की सबसे खास बात इसकी निगरानी है। केसों के चयन से लेकर पड़ताल और उसके अंतिम चरण तक की पूरी प्रक्रिया सीधे ईओडब्ल्यू मुख्यालय की कड़ी निगरानी में चल रही है।
हर विवेचक को अपने केस की स्टेटस रिपोर्ट हर हफ्ते अनिवार्य रूप से मुख्यालय को सौंपनी होती है। डीजी ईओडब्ल्यू उपेन्द्र जैन खुद हर सप्ताह को हर एक केस की प्रगति पर फीडबैक ले रहे हैं।
समीक्षा के दौरान यदि जांच अधिकारियों को किसी तकनीकी या कानूनी परामर्श की आवश्यकता होती है, तो उन्हें तुरंत उच्च स्तर पर सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए यह विशेष अभियान प्रभावी रूप से चलाया जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, पिछले महीने में लागू किए गए इन कड़े नियमों के नतीजे बेहद सकारात्मक रहे हैं, जिसके चलते इस अभियान को इस माह भी पूरी सख्ती और ऊर्जा के साथ जारी रखा गया है।