
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। बौद्ध मठों के पते पर फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले गिरोह से पूछताछ में सामने आया है कि आरोपितों ने मठों के पते का उपयोग इसलिए किया क्योंकि वहां पुलिस सत्यापन के दौरान ज्यादा पूछताछ नहीं होती थी। गिरफ्तार आरोपितों ने एसटीएफ को बताया है कि बौद्ध मठ के पते पर आसानी से पासपोर्ट बन जाते हैं।
इसी का फायदा उठाकर वर्ष 2021 से 2023 के बीच 70 संदिग्ध पासपोर्ट बनवाए गए। हालांकि जांच के बाद इनमें दो सही पाए गए हैं। शेष 68 की जांच जारी है। जांच से पता चला कि सही पासपोर्ट वाले दोनों आवेदकों ने केवल सत्यापन के लिए घर के बजाय बौद्ध मठ का पता दिया था। वे मठ के पास ही एक झुग्गी बस्ती में रह रहे थे।
एसटीएफ की जांच में भोपाल के अन्नानगर स्थित बौद्ध मठ के पते पर 40, डबरा (ग्वालियर) के बौद्ध विहार के पते पर 17, बैतूल के आमला में 11 और छिंदवाड़ा व पांढुर्णा के पतों पर बने एक-एक पासपोर्ट सामने आए हैं। मुख्य आरोपित रियाल चौधरी सहित छह की गिरफ्तारी हो चुकी है।
29 आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए 20-20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। बताया जा रहा है कि इनमें कुछ के अभिभावक बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं। बाद में इन्होंने असम व अन्य राज्यों से पहचान के दस्तावेज व आधार आदि बनवा लिए थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि जिनके पासपोर्ट बने हैं, उनमें से कुछ विदेश यात्रा पर भी गए थे। इनमें पांच तो भारत वापस ही नहीं आए हैं। एसटीएफ की टीमें कई राज्यों में तलाशी अभियान भी चला रही हैं। कुछ पासपोर्ट में दिए गए स्थानीय पते तो मध्य प्रदेश के थे, लेकिन जन्म प्रमाण पत्र और दूसरे आवश्यक दस्तावेज दूसरे राज्यों से जारी किए गए थे।
पासपोर्ट बनाने के पहले भौतिक सत्यापन करने वाले पुलिसकर्मी भी जांच की परिधि में हैं। यह भी देखा जा रहा है दस्तावेज का परीक्षण करने वाले पासपोर्ट कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारियों ने क्या अनदेखी की है। वे भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। इनमें कुछ का तो भोपाल से स्थानांतरण भी हो चुका है। एक पासपोर्ट अधिकारी की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। उसका भोपाल से तबादला हो चुका है। भोपाल के एक दलाल की फर्जी पासपोर्ट बनवाने में बड़ी भूमिका रही है।
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