MP में खाद वितरण पर से रोक हटी : 82 लाख किसानों का इंतजार खत्म,17 अगस्त से दोबारा शुरू होगी बिक्री
सरकार का दावा है कि 17 अगस्त से खाद वितरण शुरू होने के बाद किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।
Publish Date: Sun, 16 Aug 2026 08:20:40 AM (IST)Updated Date: Sun, 16 Aug 2026 08:20:40 AM (IST)
फोटो एआई से तैयार की गई है।HighLights
- 17 अगस्त से प्रदेश में खाद वितरण फिर होगा शुरू
- 16 अगस्त शाम तक iFMS और वास्तविक स्टॉक का होगा मिलान
- सरकार का दावा: 82 लाख किसानों को मिलेगी राहत
डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश में खाद की बिक्री पर लगाई गई अस्थायी रोक के बाद सरकार ने वितरण शुरू करने की समय-सीमा तय कर दी है। किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के अनुसार भारत सरकार के iFMS पोर्टल पर दर्ज उर्वरक स्टॉक और प्रदेश के खाद विक्रेताओं के वास्तविक भौतिक स्टॉक का मिलान 16 अगस्त की शाम तक पूरा कर लिया जाएगा।
इसके बाद 17 अगस्त से किसानों को खाद का वितरण शुरू कर दिया जाएगा।
सरकार का कहना है कि किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाएगी। बिक्री रोकने के फैसले के बाद प्रदेश के करीब 82 लाख पंजीकृत किसानों के सामने खाद की उपलब्धता को लेकर चिंता पैदा हो गई थी।
14 अगस्त शाम से बंद है खाद की बिक्री
विभाग ने 14 अगस्त को आदेश जारी कर अनुदानित खाद की बिक्री आगामी आदेश तक रोक दी थी। यह रोक 14 अगस्त शाम 7 बजे से लागू हुई। 15 और 16 अगस्त को अवकाश होने के कारण इन दो दिनों में भी बिक्री बंद रखी गई।
सरकार ने बताया कि बिक्री रोकने का मुख्य उद्देश्य iFMS पोर्टल पर दर्ज स्टॉक और खाद विक्रेताओं के पास उपलब्ध वास्तविक स्टॉक का मिलान करना है। यह व्यवस्था विपणन संघ, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों, एमपी एग्रो और निजी उर्वरक विक्रेताओं के बिक्री केंद्रों पर लागू की गई है।
16 अगस्त तक स्टॉक मिलान, 17 से वितरण
विभाग के अनुसार स्टॉक मिलान की प्रक्रिया 16 अगस्त की शाम तक पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद 17 अगस्त से खाद की बिक्री फिर शुरू होगी। सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि उनकी आवश्यकता के अनुसार खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
खरीफ सीजन में 82 लाख किसानों को जरूरत
प्रदेश में करीब 82 लाख पंजीकृत किसान हैं। खरीफ सीजन में फसलों की बोवनी के बाद अब फसल बढ़ने के साथ यूरिया और अन्य उर्वरकों की आवश्यकता बढ़ रही है। प्रदेश में करीब 152 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती** होती है। ऐसे में खाद की उपलब्धता किसानों के लिए महत्वपूर्ण है।
विशेषकर धान सहित अन्य खरीफ फसलों में आगामी दिनों में उर्वरकों की मांग बढ़ने की संभावना है। इसी वजह से बिक्री बंद किए जाने को लेकर किसान संगठनों ने भी सवाल उठाए थे।
किसान संगठन ने बिक्री रोकने पर जताई थी आपत्ति
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा कक्काजी ने खाद की बिक्री रोकने के फैसले को गलत बताया था। उनका कहना था कि किसानों को इस समय यूरिया और अमोनियम सल्फेट की आवश्यकता है और खाद की जरूरत फसल के अनुसार होती है, सरकारी आदेश के अनुसार नहीं।
उन्होंने आशंका जताई थी कि समय पर खाद नहीं मिलने से फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। उनका कहना था कि स्टॉक मिलान के लिए बिक्री रोकने का सीधा असर किसानों पर पड़ सकता है।
कालाबाजारी की आशंका भी उठी
खाद की बिक्री बंद होने के दौरान किसानों को उपलब्धता को लेकर परेशानी बढ़ने पर कालाबाजारी की आशंका भी जताई गई थी। अधिकृत केंद्रों पर खाद नहीं मिलने की स्थिति में किसानों के निजी बाजार का रुख करने और वहां अधिक कीमत वसूले जाने की आशंका व्यक्त की गई थी।
हालांकि, फिलहाल प्रदेश में खाद की कालाबाजारी शुरू होने की कोई सूचना सामने नहीं आई है।