
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग में वर्ष 2010 में डाटा एंट्री ऑपरेटरों की नियुक्ति की मूल नस्ती (फाइल) संचालनालय भोपाल से गायब हो गई है। इस प्रशासनिक लापरवाही को छिपाने के लिए विभाग ने वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ काम कर रहे 16 संविदा कर्मचारियों को बिना किसी लिखित आदेश के नौकरी से बाहर कर दिया है। पीड़ित कर्मचारियों ने मुख्य सचिव से न्याय और बहाली की गुहार लगाई है।
यह मूल नस्ती तत्कालीन मंत्री के कार्यालय से सीधे आयुक्त कार्यालय भेजी गई थी, जिसके बाद से इसका कोई अता-पता नहीं है। विभाग ने इस गंभीर मामले में अब तक कोई एफआईआर भी दर्ज नहीं कराई है। उल्टा अपनी लापरवाही को दबाने के लिए विभाग द्वारा एक नई फाइल क्र./एफ 7-2/2013/23-योआसा तैयार कर शासन के समक्ष पेश की जा रही है।
इधर, इस पूरे मामले में मंडला जिला योजना अधिकारी ओमप्रकाश सिरसे का कहना है कि जो शिकायत की गई थी, उसका प्रति उत्तर भोपाल में दे दिया गया है। नियुक्ति का आदेश दो वर्ष के लिए ही दिया गया था।
दस्तावेजों में यह भी साफ किया गया है कि तीन मई 2016 को मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) के आदेश तहत इन नवनिर्मित डाटा एंट्री ऑपरेटरों की सेवा वृद्धि कर लिपिक संवर्ग के रिक्त पदों की पूर्ति की जानी थी, जिसे वित्त विभाग की मंजूरी के बाद भी आज तक स्थगित रखा गया है। 29 मई 2018 के मंत्रिपरिषद आदेश का भी विभाग द्वारा उल्लंघन किया जा रहा है और उसका पालन नहीं किया जा रहा है।
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पीड़ित डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से लिखित आवेदन कर गुम हुई मूल नस्ती आदेश क्र./एफ 1-6/2010/23/योआसा भोपाल के गायब होने की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।
साथ ही इस लापरवाही के जिम्मेदार दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई और मंत्रिपरिषद के 29 मई 2018 के आदेश का पालन करते हुए सभी प्रभावित कर्मचारियों को नौकरी में बहाल करने की मांग की है। इस मामले में मध्य प्रदेश योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव श्रीमन शुक्ला व आयुक्त स्वरोचिष सोमवंशी से संपर्क किया गया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।