
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी के एयरोसिटी क्षेत्र में देश का अपनी तरह का पहला ग्रिड कंट्रोल सेंटर कांप्लेक्स बनने जा रहा है। करीब 305 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाले इस अत्याधुनिक परिसर से देश के पश्चिमी क्षेत्र यानी इंदौर-उज्जैन संभाग के 15 जिलों के बिजली ग्रिड को नियंत्रित किया जाएगा। परियोजना को करीब दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे भोपाल की पहचान ऊर्जा क्षेत्र के बड़े तकनीकी केंद्र के रूप में भी मजबूत होगी।
भोपाल संभागायुक्त कार्यालय में गुरुवार को संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा की अध्यक्षता में ग्रिड इंडिया लिमिटेड और भोपाल विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें परियोजना की प्रगति और निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में ग्रिड इंडिया लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक एमके रमेश, एसएस रघुवंशी, बीडीए सीईओ श्याम वीर सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
बैठक में जानकारी दी गई कि कंट्रोल सेंटर कांप्लेक्स का निर्माण भोपाल विकास प्राधिकरण करा रहा है। इसके लिए ग्रिड इंडिया लिमिटेड के साथ ‘कांसेप्ट टू कम्पलीशन’ एमओयू भी हो चुका है और परियोजना के लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है।
निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया, भवन अनुज्ञा, पर्यावरणीय स्वीकृति, भूमि उपयोग परिवर्तन और ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन सहित विभिन्न अनुमतियों पर चर्चा हुई। जिसमें संभागायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जरूरी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हों, ताकि निर्माण में किसी तरह की बाधा न आए। परियोजना का निर्माण उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए।
बिजली व्यवस्था और ग्रिड को नियंत्रित किए जाने का अर्थ है कि बिजली के प्रवाह, वोल्टेज और मांग (लोड) को डिजिटल और आटोमैटिक तकनीक (जैसे स्मार्ट ग्रिड और स्काडा) के जरिए सटीक रूप से मानिटर और संचालित करना। इसका मुख्य उद्देश्य बिना किसी रुकावट के भरोसेमंद बिजली देना और कटौती रोकना है।
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