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मध्य प्रदेश में 37 करोड़ की फोरेंसिक वैन बनीं शोपीस! 57 में से 29 गैरेज में कबाड़, स्टाफ की कमी से अटका काम

केंद्रीय गृह मंत्रालय से करीब 37 करोड़ रुपये की लागत से मिलीं 57 फोरेंसिक वैनों में से 29 वैन गैरेज में खड़े-खड़े कबाड़ हो रही हैं।

By prashant vyasEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Tue, 13 Oct 2026 06:40:00 PM (IST)Updated Date: Tue, 13 Oct 2026 06:40:00 PM (IST)
मध्य प्रदेश में 37 करोड़ की फोरेंसिक वैन बनीं शोपीस! 57 में से 29 गैरेज में कबाड़, स्टाफ की कमी से अटका काम
फोरेंसिक वैन (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. 37 करोड़ की 57 फोरेंसिक वैनों में से 29 गैरेज में बंद
  2. वैज्ञानिक अधिकारियों की कमी के कारण 19 जिलों में ही काम चालू
  3. उपकरणों की वारंटी खत्म होने से सरकारी खजाने पर बढ़ेगा बोझ

प्रशांत व्यास, नईदुनिया, भोपाल। अपराधों की जांच में तेजी लाने और नए कानून को लागू करने के लिए चलित अपराध विज्ञान प्रयोगशालाएं महत्वपूर्ण हैं। लेकिन मध्य प्रदेश में इनकी उपयोगिता सुनिश्चित नहीं हो पा रही। केंद्रीय गृह मंत्रालय से करीब 37 करोड़ रुपये की लागत से मिलीं 57 फोरेंसिक वैनों में से 29 वैन गैरेज में खड़े-खड़े कबाड़ हो रही हैं।

दरअसल, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की अवधारणा के अनुरूप सात साल या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में घटनास्थल पर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने और उन्हें सुरक्षित रखने की व्यवस्था बननी थी। इसके लिए हर पुलिस अनुविभाग में एक चलित एफएसएल वैन की जरूरत है। राज्य सरकार को 174 और केंद्र सरकार को 57 वैन उपलब्ध करानी थीं।


आखिर क्यों खड़ी रहीं वैन?

पिछले साल केंद्र ने 65 लाख रुपये प्रति वैन की दर से 57 चलित प्रयोगशालाएं मध्य प्रदेश भेजीं। दिसंबर 2025 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन्हें हरी झंडी दिखाई। लेकिन पर्याप्त वैज्ञानिक अधिकारी न होने के कारण वैन मुख्यालय में कई माह तक खड़ी रहीं। सवाल उठने पर सितंबर 2026 में इन्हें जिलों में भेजा गया।

लेकिन इनके संचालन के लिए केवल 27 वैज्ञानिक अधिकारी हैं, जो भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, मुरैना, खरगोन, उज्जैन, शहडोल, टीकमगढ़, धार, रतलाम, नर्मदापुरम, सतना, बड़वानी, रीवा और झाबुआ में तैनात हैं। इन 19 जिलों में 28 वैन का उपयोग हो रहा है। अन्य जिलों में भेजी गईं 29 वैन पुलिस लाइन के गैरेज में खड़ी हैं। रायसेन जैसे कुछ जिलों में अप्रशिक्षित पुलिसकर्मी या फिंगरप्रिंट और डाग स्क्वाड की टीमें इनका इस्तेमाल कर रही हैं।

उपकरणों की वारंटी खत्म हुई तो दोबारा बढ़ेगा खर्च

वैन में स्टीरियो माइक्रोस्कोप, वेइंग बैलेंस, डीएसएलआर कैमरा, मिनी फ्रिज, एलईडी स्क्रीन, थर्मल प्रिंटर और बाडी-वार्न कैमरे हैं। किट में फिंगरप्रिंट, खून, बाल, डीएनए सैंपल, गनशाट रेजिड्यू, नशीले पदार्थों, विस्फोटकों और आगजनी से जुड़े साक्ष्य जुटाने के उपकरण हैं। बुलेट होल और पैरों व टायरों के निशान की जांच के उपकरण भी दिए गए हैं। उपकरणों की वारंटी और जांच किट की उपयोग अवधि खत्म होने का खतरा है। इनके खराब या अनुपयोगी होने पर दोबारा इस्तेमाल योग्य बनाने में सरकारी खजाने से अतिरिक्त खर्च हो सकता है।

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सभी मोबाइल फोरेंसिक वैन संबंधित जिलों में भेज दी गई हैं। नए वैज्ञानिक अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द पूरी होने की उम्मीद है। नियुक्ति के बाद इन वैन का उपयोग शुरू हो सकेगा। - राहुल लोढ़ा, संचालक, एफएसएल